Farmers Protest: अमित शाह के पंजाब दौरे पर KMM ने किया जमकर विरोध-प्रदर्शन, उठाई ये बड़ी मांगें

Farmers Protest: अमित शाह के पंजाब दौरे पर KMM ने किया जमकर विरोध-प्रदर्शन, उठाई ये बड़ी मांगें

KMM Protest: पंजाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. राज्य के 19 जिलों में कई जगहों पर किसानों ने पुतले जलाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताई और MSP गारंटी कानून समेत कई अहम मांगों को लेकर आवाज उठाई.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 14, 2026,
  • Updated Mar 14, 2026, 3:57 PM IST

पंजाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान किसानों और मजदूरों ने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के आह्वान पर शनिवार को राज्य के 19 जिलों में 33 स्थानों पर किसानों और मजदूरों ने अमित शाह के पुतले जलाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जताई. प्रदर्शन के दौरान हजारों किसान और मजदूर सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार की कृषि, श्रम और आर्थिक नीतियों को किसान-मजदूर विरोधी बताया.

'कृ‍षि अर्थव्‍यवस्‍था को नुकसान पहुंचाने का लगाया आरोप'

किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा ने मोगा में आयोजित कार्यक्रम को “बदलाव रैली” का नाम दिया, लेकिन सरकार की नीतियां पंजाब की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही हैं. किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र को शामिल करना पंजाब समेत पूरे देश के किसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. उन्‍होंने कहा कि इससे स्थानीय कृषि बाजार और किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा.

नए बीज कानून पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 और प्रस्तावित बीज अधिनियम को भी किसानों और छोटे उद्यमों के लिए नुकसानदायक बताया. किसान-मजदूर नेताओं ने कहा कि बिजली से जुड़े नए प्रावधानों का सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जबकि बीज कानून छोटे बीज कारोबारियों, किसानों और देश के शोध संस्थानों को कमजोर कर सकता है. किसान संगठन ने इन विधेयकों को वापस लेने की मांग दोहराई.

श्रम कानून को बताया मजदूर-विरोधी

मजदूर संगठनों से जुड़े नेताओं ने चार नए श्रम संहिताओं को लेकर भी सरकार की आलोचना की. उन्‍होंने कहा कि पुराने श्रम कानूनों को हटाकर लागू की गई नई संहिताओं से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे निजी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए यूनियन बनाने का अधिकार सीमित हो गया है और काम के घंटों में बढ़ोतरी की आशंका है.

प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने मनरेगा को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले रोजगार के अवसर पहले ही सीमित हैं और अगर इस योजना के बजट में कटौती होती है तो इसका असर ग्रामीण आजीविका पर पड़ेगा. किसानों ने यह भी कहा कि सरकार ने आंदोलनों के दौरान एमएसपी को कानूनी गारंटी देने और किसानों को कर्ज से राहत देने के जो वादे किए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं.

किसान आत्‍महत्‍या के डेटा की मांग की

किसान नेताओं ने कहा कि बढ़ती खेती लागत और आर्थिक दबाव के कारण किसानों और मजदूरों की स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों का डेटा भी अब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है. साथ ही, उन्होंने दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों को हरियाणा की सीमाओं पर रोकने और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती का भी मुद्दा उठाया.

इस विरोध कार्यक्रम के तहत अमृतसर के पुराने CP कार्यालय में एक बड़ी जनसभा आयोजित की गई. इसके बाद किसानों और मजदूरों ने शहर में विरोध मार्च निकाला और दशहरा मैदान में अमित शाह का पुतला फूंका. सभा में कई किसान संगठनों और मजदूर यूनियनों के नेताओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान पारित प्रस्ताव में भारत-पाकिस्तान व्यापार गलियारे को खोलने की मांग की गई.

साथ ही उन सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई की भी मांग उठाई गई, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है. नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार को लंबे समय से चल रहे आंदोलनों से बातचीत कर किसानों और मजदूरों की मांगों का समाधान निकालना चाहिए. विरोध-प्रदर्शन में विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार से कृषि, श्रम और ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार करने की मांग की.

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