Indo-US Deal के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच, 21 जुलाई को किसान घाट पर होगी महारैली

Indo-US Deal के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच, 21 जुलाई को किसान घाट पर होगी महारैली

देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में विशाल महारैली आयोजित होगी. पंजाब समेत कई राज्यों से किसान संगठनों के काफिले दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. किसान नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी और छोटे उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

India-US FTA Farmers ProtestIndia-US FTA Farmers Protest
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली/चंडीगढ़ ,
  • Jul 20, 2026,
  • Updated Jul 20, 2026, 7:51 PM IST

देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर विशाल महारैली आयोजित की जाएगी. इस रैली में भाग लेने के लिए पंजाब सहित देश के अलग-अलग राज्यों से किसानों के काफिले दिल्ली की ओर रवाना हो रहे हैं.

किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि अमृतसर और गुरदासपुर जिलों से सैकड़ों बसों और अन्य गाड़ियों का काफिला ब्यास पुल से दिल्ली के लिए रवाना हुआ है. इसके अलावा किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर), संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष और अन्य किसान संगठनों के कार्यकर्ता भी अलग-अलग जिलों से राजधानी की ओर कूच कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि कई संगठन अपने-अपने तय कार्यक्रम के अनुसार रास्ते में रात्रि विश्राम करेंगे. किसान मजदूर संघर्ष समिति का काफिला फतेहगढ़ साहिब-सरहिंद में रुकने के बाद अगले दिन सुबह शंभू बॉर्डर के रास्ते दिल्ली पहुंचेगा.

क्या कहा पंधेर ने?

पंधेर ने कहा कि फरवरी 2025 में भारत और अमेरिका के संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में आगे बढ़ने और इसके पहले चरण पर बातचीत करने की बात कही थी. उनका कहना है कि प्रस्तावित समझौता केवल सीमित व्यापारिक वस्तुओं तक नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, निवेश, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है.

किसान नेताओं का आरोप है कि अमेरिकी व्यापार दस्तावेजों में भारत से कृषि और डेयरी क्षेत्र में अधिक बाजार पहुंच देने की मांग लंबे समय से की जाती रही है. इनमें सोयाबीन, मक्का, कपास, इथेनॉल, सेब, बादाम सहित कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने और अमेरिकी डेयरी, पोल्ट्री, फल और मत्स्य उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने का दबाव शामिल है.

किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी उपलब्ध कराता है, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं. ऐसे में यदि सस्ते अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में बड़े स्तर पर आते हैं तो इससे किसानों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों की आजीविका पर खराब असर पड़ सकता है.

अमेरिकी डील का क्यों विरोध?

नेताओं ने दावा किया कि भारत की डेयरी अर्थव्यवस्था लगभग आठ करोड़ ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है. उनका कहना है कि डेयरी क्षेत्र को किसी भी प्रकार का नुकसान ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है. इसके अलावा बीज उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, कृषि आधारित उद्योगों और छोटे व्यापारों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

देश बचाओ मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों समेत सभी हिस्सेदारों से चर्चा के बाद ही किसी समझौते को अंतिम रूप दिया जाए.

इस दौरान हरविंदर सिंह मसाणियां, स्विंदर सिंह चुताला, लखविंदर सिंह वरियाम नंगल, जर्मनजीत सिंह बंडाला, रणजीत सिंह कलेर बाला, कंवरदलीप सैदो लेहल और गुरदासपुर जिला अध्यक्ष हरभजन सिंह वैरो नंगल सहित कई किसान नेता भी काफिले के साथ मौजूद रहे.

MORE NEWS

Read more!