PHOTOS: वाराणसी में सजा किसान कारवां 2.0 का मंच, एक्‍सपर्ट्स ने खेती से कमाई बढ़ाने की दी टिप्स

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PHOTOS: वाराणसी में सजा किसान कारवां 2.0 का मंच, एक्‍सपर्ट्स ने खेती से कमाई बढ़ाने की दी टिप्स

किसान कारवां 2.0 वाराणसी
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन सभागार में आज किसान कारवां 2.0 की छठी क्षेत्रीय किसान महासभा आयोजित हुई. यूपी सरकार और किसान तक (इंडिया टुडे ग्रुप) की संयुक्त पहल में कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, प्रगतिशील किसान और कृषि उद्यमी शामिल हुए. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार और पद्मश्री सम्मानित चंद्रशेखर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.
 

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भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि संस्थान ने सब्जियों की 200 से अधिक किस्में विकसित की हैं. इन उन्नत किस्मों से बेहतर उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर मिले हैं. मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन से महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. उन्होंने जल संरक्षण, बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर दिया.
 

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'बदलता विंध्य' सत्र का संचालन किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने किया. युवा किसान राजीव सिंह पटेल, प्रगतिशील किसान श्रेयस सिंह, मिर्जापुर के जिला हॉर्टिकल्चर अधिकारी मेवाराम, कृषि विज्ञान केंद्र मिर्जापुर के प्रमुख श्रीराम सिंह और युवा किसान अमित ने अनुभव साझा किए. मिर्जापुर और सोनभद्र में स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट की खेती से बागवानी के नए अवसर सामने आए. विशेषज्ञों ने स्थानीय जलवायु, पौध सामग्री, रोग नियंत्रण और बाजार की मांग के अनुसार खेती करने की सलाह दी.
 

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'विंध्य की हुंकार, खेती दमदार' सत्र का संचालन किसान तक की सीन‍ियर अस‍िस्‍टेंट एडिटर हिमानी दीवान ने किया. प्रगतिशील किसान शिव प्रकाश सिंह, महिला किसान वंदना सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के प्रमुख डॉ. नवीन सिंह, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश दुबे और डॉ. नीरज सिंह शामिल हुए. विशेषज्ञों ने मिर्च-टमाटर समेत उन्नत सब्जी किस्मों और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों पर चर्चा की. इस दौरान किसानों को मिट्टी की नमी बनाए रखने और सिंचाई प्रबंधन को बेहतर बनाने की सलाह दी गई.
 

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'खेती में नए विकल्प' सत्र का संचालन किसान तक के विशेष संवाददाता धर्मेंद्र सिंह ने किया. कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के वैज्ञानिक राहुल सिंह ने मशरूम और शहद उत्पादन को अतिरिक्त आमदनी के विकल्प बताया. वाराणसी के बागवानी विशेषज्ञ मनीष पांडे ने बताया कि युवा किसानों की बागवानी में रुचि बढ़ रही है. सोनभद्र के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अविनाश राय ने बागवानी, जैविक और प्राकृतिक खेती के नए प्रयोगों की जानकारी दी.
 

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सोनभद्र के प्रगतिशील किसान भानु भास्कर ने गोविंद भोग धान की खेती का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि फसल तैयार होने से पहले ही खेत से धान की बुकिंग हो चुकी है. इससे बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनने और उत्पादन करने की अहमियत सामने आई. विशेषज्ञों ने मोटे अनाज और बागवानी फसलों को भी आय के नए विकल्प के रूप में अपनाने की बात कही.
 

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महासभा में कृषि परिषद के गठन की पहल पर चर्चा हुई. इसका उद्देश्य कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को एक मंच पर लाना है. बीज, सिंचाई, फसल सुरक्षा, उत्पादन लागत, उपज का उचित मूल्य और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाई जा सकेंगी. परिषद के माध्यम से किसानों का फीडबैक कृषि योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में मददगार बन सकता है.
 

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नवाचार, फसल विविधीकरण, कृषि उद्यमिता, वैल्यू एडिशन, जैविक खेती और डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले 10 किसानों को सम्मानित किया गया. डॉ. राजेश कुमार और पद्मश्री सम्मानित चंद्रशेखर सिंह ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए.

ये किसान किए गए सम्मानित

राजीव सिंह पटेल, श्रेयस सिंह, वंदना सिंह और राम दुबे (मिर्जापुर), बाबूलाल मौर्य, शिव प्रकाश सिंह, नंदिनी और भानु भास्कर (सोनभद्र), मानसिंह पटेल और सी.एल. गौतम (प्रयागराज)
 

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सीतापुर के जादूगर सलमान ने महासभा में जादू के विभिन्न करतब दिखाए. तकनीकी चर्चाओं और विशेषज्ञों के संवाद के बीच मनोरंजन का भी इंतजाम किया गया. किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रगतिशील किसानों के अनुभव और सम्मान समारोह के जरिए खेती के नए विकल्पों से जोड़ा गया. किसान कारवां 2.0 का उद्देश्य खेती को लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय बनाना है. स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, मिर्च, टमाटर, मशरूम, शहद और गोविंद भोग धान जैसे विकल्पों पर जोर दिया गया. जल संरक्षण, उन्नत बीज, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई. वैज्ञानिक सलाह, स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के बीच तालमेल बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर रहा.