
किसानों की समस्याओं को समझने, उन्हें कृषि विशेषज्ञों से सीधे जोड़ने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया किसान कारवां 2.0 उत्तर प्रदेश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किसानों तक पहुंच रहा है. इसी कड़ी में 22 अक्टूबर को आगरा के सूर सदन प्रेक्षागृह में चौथी क्षेत्रीय किसान महासभा का आयोजन किया गया.
आगरा में आयोजित किसान महासभा में कृषि से जुड़ी गंभीर चर्चाओं के साथ किसानों के मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया. कार्यक्रम में सीतापुर के जादूगर सलमान ने जादू के विभिन्न करतब दिखाकर किसानों का मनोरंजन किया. किसान कारवां 2.0 के मंच पर किसान अपनी समस्याएं और सफल प्रयोग विशेषज्ञों के साथ साझा कर रहे हैं, जिससे खेती से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा मिल सके.
महासभा के प्रमुख सत्रों में से एक था- आलू की पैदावार कैसे लेगी किसानों के जीवन में बहार'. इस पैनल चर्चा का संचालन किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने किया. पैनल में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के ब्रीडर वैज्ञानिक डॉ. सुनील चौधरी , राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र, आगरा के प्रिंसिपल लोकेश सिंह सेंगर और प्रगतिशील किसान शिल्पी सिकरवार तथा लाखन सिंह त्यागी ने अपने विचार रखे.
किसान महासभा में दूसरा महत्वपूर्ण सत्र 'गाय का गणित- गौपालन अपनाएं, कैसे कमाई बढ़ाएं' रहा. इस सत्र का संचालन किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह ने किया. पैनल में प्रो. डॉ. के.एम.एल. पाठक, पूर्व कुलपति डॉ. रणवीर सिंह, डेयरी पशु अर्थशास्त्र विशेषज्ञ राधेश्याम शर्मा, गौ-आधारित खेती करने वाले प्रगतिशील किसान और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सोमेश चंद्र गुप्ता शामिल हुए.
किसान कारवां 2.0 के दौरान कृषि परिषद के गठन की पहल की जानकारी भी साझा की गई. इसमें कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को शामिल करने का उद्देश्य किसानों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत बनाना है. इस परिषद के माध्यम से किसानों की जमीनी समस्याओं, खेती में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और सरकारी योजनाओं से जुड़े उनके अनुभवों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है.
किसान कारवां 2.0 के तहत कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसानों को पहचान देने के लिए 'कृषि वीर' सम्मान की पहल की गई है. इसका उद्देश्य नवाचार, उद्यमिता और बेहतर खेती के तरीकों को अपनाने वाले किसानों के काम को सामने लाना है, ताकि दूसरे किसान भी उनसे प्रेरणा ले सकें.