नेपाल सीमा से सटे और राप्ती नदी के किनारे बसे बलरामपुर जनपद के सिशानिया घोपलापुर गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने 44वें पड़ाव पर पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत चल रहे इस अभियान में सुबह से ही किसानों की भारी भीड़ उमड़ी. बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने कार्यक्रम में भाग लेकर खेती, पशुपालन और आय बढ़ाने से जुड़ी अहम जानकारियां हासिल की.
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनसे अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बदलते जलवायु के बीच आधुनिक खेती अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि नई तकनीकों से लागत कम कर उत्पादन और आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं.
पशुपालन से आय बढ़ाने का संदेश
पहले चरण में जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने पशुओं के टीकाकरण अभियान, ‘भारत पशुधन ऐप’ और निःशुल्क बधियाकरण की जानकारी दी. उन्होंने ‘नंदिनी कृषक समृद्धि योजना’ सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की अपील की और कहा कि पशुपालन अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
दूसरे चरण में कृषि विभाग के वरिष्ठ प्राविधिक सहायक आलोक कुमार सोनकर ने बताया कि अब उर्वरक प्राप्त करने के लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए किसानों को अपडेट रहने की सलाह दी.
बखारी और स्प्रे मशीन पर अनुदान
तीसरे चरण में कृषि विभाग के वरिष्ठ प्राविधिक सहायक सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने बखारी और स्प्रे मशीन पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी दी. साथ ही किसानों को सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के व्हाट्सएप नंबर 9452247111 और 9452257111 पर समस्याएं भेजने की सुविधा के बारे में बताया गया.
चौथे चरण में जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी ने रसायन-मुक्त खेती अपनाने और सब्जी उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि सरकार बीज और अन्य सुविधाओं पर अनुदान भी उपलब्ध करा रही है.
मधुमक्खी पालन और जलवायु से बचाव
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. गिरिजेश जायसवाल ने किसानों को समय के साथ अपडेट रहने की सलाह दी. उन्होंने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और मधुमक्खी पालन को अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में अपनाने पर जोर दिया.
छठवें चरण में इफको के प्रतिनिधि गौरव शर्मा ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि इनसे फसलों को 80-90 प्रतिशत तक पोषक तत्व मिलते हैं और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है.
मखाना खेती के अवसर
सातवें चरण में डॉ. जय प्रकाश कुमार ने मखाना की खेती की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बलरामपुर समेत आसपास के जिलों में इसकी खेती की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं.
आठवें चरण में डॉ. सियाराम ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए खेती का अस्पताल है. यहां खेती और पशुपालन से जुड़ी हर समस्या का समाधान मिलता है. उन्होंने गन्ने के साथ सहफसली खेती अपनाने की सलाह दी.
बायो-पेस्टिसाइड के उपयोग पर जोर
नौवें चरण में इफको एमसी के प्रतिनिधि हर्षित कुमार ने बायो-पेस्टिसाइड के उपयोग के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि ये उत्पाद सुरक्षित और प्रभावी हैं और रासायनिक विकल्पों की जगह अपनाए जा सकते हैं.
दसवें चरण में मैजिशियन सलमान ने कला के माध्यम से किसानों को खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां दीं. उन्होंने गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का संदेश दिया. वहीं, अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 किसानों को 500 रुपये और 5 किसानों को 1000 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया. यह किसान कारवां उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत किसानों को आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के तरीकों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच बनकर उभर रहा है.