महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लगातार मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. बदलते मौसम के कारण तुअर की फसलों पर कई तरह की बीमारियों का संक्रमण हुआ है. इसके कारण तुअर की फसल बर्बाद हो गई है. हिंगोली में बड़ी मेहनत से उगाई तुअर की फसल को नष्ट करने के लिए किसान ने पूरी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया.
किसान का कहना है कि बाद में उपज ना मिले, उससे अच्छा है कि पहले ही उसे नष्ट कर उसी खेत में कोई और फसल लगा दी जाए. महाराष्ट्र में इन दिनों लगातार बदलते मौसम के कारण किसान परेशान हैं. पहले भारी बारिश के कारण खरीफ की फसल तबाह हो गई थी.
किसानों को आस थी कि रबी के सीजन में फसल अच्छी आएगी. मगर इस बार भी आसमानी संकट के आगे किसानों को झुकना पड़ रहा है. हिंगोली में पिछले कुछ दिनों से, कभी बारिश, तो कभी आसमान में बादल छाने से, तो कभी घने कोहरे के कारण तुअर समेत, चना, गेहूं की फसल बर्बाद हो रही है.
बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर तुअर की फसलों पर हुआ है. इस साल हिंगोली में तुअर उत्पादक किसानों ने ज्यादा पैमाने पर इसकी फसल लगाई थी. उनमें से एक किसान अतुल राउत भी थे. साकरा के रहने वाले किसान अतुल राउत ने इस साल अपने 10 एकड़ खेत में तुअर की फसल लगाई थी.
खरीफ में आई बाढ़ और बारिश से राउत की आधी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई. जो फसल उन्होंने बचाई थी, उन पर बदलते मौसम के कारण कई बीमारियों का संक्रमण हुआ. इसके कारण तुअर के पौधों में फलियां नहीं आई. इसके बाद पूरी फसल बांझ हो गई. तुअर और अरहर की फसल में बांझपन बहुत बड़ी समस्या है.
किसान ने कहा कि तुअर कि फसलों पर हुई बीमारियों और संक्रमण को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयां छिड़की, कृषि विभाग से भी सलाह ली मगर इसका कोई लाभ नहीं हुआ. ऐसे में तंग आकर फसल पर रोटावेटर चला रहे हैं. उनके सामने पूरी फसल को नष्ट करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि अगली फसल तभी लगाएंगे जब तुअर के पौधों को हटाएंगे.
किसान ने बताया कि तुअर की फसल पर बुवाई से लेकर अब तक एक से डेढ़ लाख के करीब खर्च किया है. इस फसल से उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये के करीब उत्पादन मिलने वाला था. मगर अब फसल बर्बाद होने के कारण उन्हें तुअर की फसल पर रोटावेटर चलाना पड़ रहा है. उनके अलावा साकरा गांव के 50 फीसद से अधिक किसानों की तुअर की फसल बर्बाद हो गई है.