
पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े मिट्टी के बांध 'पांचना बांध' का पानी एक बार फिर विवादों के भंवर में फंस गया है. हालात ऐसे हैं कि बांध का पानी न पूरी तरह खेतों तक पहुंच पा रहा है और न ही वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे किसानों का संघर्ष खत्म हो रहा है. एक तरफ 39 गांवों के किसान पिछले एक महीने से बांध पर पहरा देकर पानी रोकने पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ 35 गांवों के किसान हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पानी छोड़ने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. मामला इतना गर्मा गया है कि अब आंदोलनकारियों ने 28 जून को रेल रोकने की चेतावनी तक दे डाली है. ऐसे में पांचना का पानी सिर्फ सिंचाई का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी संघर्ष का बड़ा केंद्र बन गया है.
मई महीने में हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पांचना बांध का पानी जल्द कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ा जाए. हालांकि, यह पहली बार नहीं है. पिछले 20 वर्षों में तीसरी बार अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी आदेश और जमीन की हकीकत के बीच बड़ी दूरी नजर आ रही है. सरकार अब तक न तो पानी रोकने वाले गांवों को संतुष्ट कर पाई है और न ही कमांड क्षेत्र के किसानों को उनका अधिकार दिला सकी है.
पांचवा बांध विवाद की जड़ें वर्ष 2006 में हुए गुर्जर आंदोलन से जुड़ी हैं. बांध निर्माण के दौरान जिन गांवों की जमीनें डूब क्षेत्र में चली गईं, वहां के किसानों का कहना है कि पानी पर पहला अधिकार उनका है. इसी मांग को लेकर उन्होंने नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध शुरू कर दिया. तब से लेकर आज तक स्थिति यह है कि नहरों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच पाया. बांध का पानी साल में केवल एक बार श्रीमहावीरजी मेले के दौरान गंभीर नदी में धार्मिक उपयोग के लिए छोड़ा जाता है. डूब क्षेत्र के किसानों ने 16 मई से बांध के पास मोर्चा संभाल रखा है.
पांचना-गुडला संघर्ष समिति के नेतृत्व में 39 गांवों के लोग दिन-रात पहरा दे रहे हैं. उनका आरोप है कि बांध निर्माण में उनकी जमीनें चली गईं, लेकिन बदले में सिंचाई का लाभ नहीं मिला. अब खंडीप में चल रहे धरने की कमान कांग्रेस के गंगापुर सिटी से विधायक रामकेश मीणा ने संभाल रखी है. उनका कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश आने के बावजूद सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है. यदि 27 जून तक स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया तो 28 जून को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा.
इधर राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से चर्चा की है. उनका कहना है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाना किसानों के साथ अन्याय है. कृषि मंत्री के अनुसार, पानी नहीं मिलने से लगभग 9,985 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई से वंचित है और करीब 35 गांवों के 1.25 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
वही, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम का कहना है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे का न्यायोचित समाधान निकालने के लिए सभी पक्षों से बातचीत कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है, जबकि सरकार किसानों के हित में गंभीरता से काम कर रही है. बेडम के अनुसार पांचना बांध से जुड़े तीन प्रमुख पक्ष हैं और सरकार किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने देगी. पंच-पटेलों और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सहमति आधारित समाधान तलाशा जाएगा.
दरअसल, पांचना मूल रूप से फ्लड कंट्रोल बांध है. निर्माण के समय कमांड क्षेत्र को गलत तरीके से जोड़ा गया. वर्ष 2010 में तत्कालीन सरकार ने प्रभावित गांवों तक लिफ्ट योजना से पानी पहुंचाने के लिए 13 करोड़ रुपए मंजूर किए थे, लेकिन आज तक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. वहीं, दूसरी ओर, करौली-गंगापुरसिटी सीमा पर खंडीप गांव में कमांड क्षेत्र के किसान पिछले दस दिनों से धरना दे रहे हैं. उनका कहना है कि 1992 से 2005 तक उन्हें नहरों से पानी मिलता रहा, इसलिए उनका हक छीना नहीं जा सकता. पानी के इस संघर्ष को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है. दोनों पक्षों के आंदोलन को कई लोग गुर्जर और मीणा समाज के बीच खींचतान के रूप में भी देख रहे हैं. हालांकि, दोनों पक्ष खुद को किसानों की लड़ाई लड़ने वाला बता रहे हैं.
पांचना बांध की कमांड एरिया की नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग को लेकर जारी किसानों के आंदोलन के बीच प्रशासन ने समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है. किसानों की मांगों और अलग-अलग स्तरों पर उठ रहे मुद्दों को देखते हुए भरतपुर संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर कानाराम, करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा समेत दोनों जिलों के सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. इस दौरान पांचना बांध से जल वितरण व्यवस्था, कमांड और कैचमेंट क्षेत्र के किसानों के हितों, 39 गांवों के लिए की गई बजट घोषणा और मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की गई.
संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने बताया कि विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान निकालने के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है. इसी कड़ी में करौली और सवाई माधोपुर जिले के किसानों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक 18 जून को भरतपुर संभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित की जाएगी. इस बैठक में दोनों जिलों के किसान प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और मांगों को सुना जाएगा. साथ ही राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा.
बता दें कि पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर कमांड क्षेत्र के किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए उन्हें उनके हिस्से का पानी मिलना चाहिए, ताकि खेती को राहत मिल सके. वहीं, प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत और समन्वय के जरिए इस विवाद का समाधान निकाला जाएगा. प्रस्तावित बैठक के बाद किसानों, प्रशासन और सरकार के बीच सहमति बनाने की दिशा में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. (शरत कुमार और सुनील जोशी की रिपोर्ट)