5 घड़े पानी में कैसे चलेगा घर? लातूर के इस गांव में जलसंकट से हाहाकार!

5 घड़े पानी में कैसे चलेगा घर? लातूर के इस गांव में जलसंकट से हाहाकार!

महाराष्ट्र के लातूर जिले में कम बारिश के चलते पानी का संकट गहराता जा रहा है. चाकूर तहसील के वड़वाल नागनाथ गांव में करीब 11 हजार लोगों को घंटों कतार में खड़े होने के बाद भी रोजाना सिर्फ पांच घड़े पानी मिल रहा है.

पानी की किल्लतपानी की किल्लत
अनिकेत जाधव
  • latur,
  • Oct 05, 2026,
  • Updated Oct 05, 2026, 1:24 PM IST

महाराष्ट्र के लातूर जिले में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. चाकूर तहसील के वड़वाल नागनाथ गांव में लोगों को पीने के पानी के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है. इसके बावजूद एक परिवार को रोजाना सिर्फ पांच घड़े पानी ही मिल पा रहा है. इससे लोगों के सामने पीने के पानी के साथ-साथ घर के दूसरे जरूरी कामों के लिए पानी जुटाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

पानी के लिए घंटों लग रही लाइन

गांव की पानी की टंकी में पानी पहुंचाने वाले कुओं और बोरवेल का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. इसकी वजह से पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई है. ग्रामीणों के मुताबिक, कई घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पा रहा है. वड़वाल गांव की आबादी करीब 11 हजार है. इतनी बड़ी आबादी के लिए हर दिन लाखों लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में लोगों को सीमित मात्रा में ही पानी मिल रहा है.

टैंकर से पानी सप्लाई की मांग

पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में सरकारी टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की गंभीर समस्या के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से टैंकर शुरू करने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी से पानी की यह स्थिति है तो आने वाले गर्मी के महीनों में हालात और खराब हो सकते हैं. गर्मी का मौसम शुरू होने में अभी करीब पांच महीने का समय है, लेकिन गांव में अभी से पानी के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है.

पानी की कमी से पशुपालन भी मुश्किल

पानी की कमी का असर गांव के किसानों और पशुपालकों पर भी पड़ रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, जब इंसानों के लिए ही पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है, तो मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना और भी मुश्किल हो गया है. इसी वजह से कुछ किसानों को अपने मवेशी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि मवेशियों को पानी पिलाने और उनके लिए दूसरी व्यवस्थाएं करने में लगातार परेशानी हो रही है. ऐसे में पशुओं को रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है.

लातूर में सिर्फ 30 फीसदी हुई बारिश

ग्रामीणों के मुताबिक, इस साल लातूर जिले में सामान्य मॉनसून की तुलना में केवल 30 फीसदी बारिश हुई है. कम बारिश का असर अब जलस्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है. कुएं और बोरवेल सूखने की कगार पर हैं और गांव की पानी की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन के अधिकारियों से गांव का दौरा कर मौजूदा स्थिति का जायजा लेने और तत्काल टैंकर के जरिए पानी की सप्लाई शुरू करने की मांग की है. लोगों को चिंता है कि अगर समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो गर्मी के मौसम में संकट और गहरा सकता है. 

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