तेलंगाना में 48 घंटे में दो किसानों की आत्महत्या, कर्ज और फसल नुकसान बना कारण

तेलंगाना में 48 घंटे में दो किसानों की आत्महत्या, कर्ज और फसल नुकसान बना कारण

तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले में 48 घंटे के भीतर दो किसानों की आत्महत्या से हड़कंप मच गया. कर्ज और लगातार फसल नुकसान को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है.

किसानों की आत्महत्याकिसानों की आत्महत्या
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 18, 2026,
  • Updated Mar 18, 2026, 7:40 PM IST

तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले में दो दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं. यहां के रगोतम्पल्ली  गांव में 48 घंटों के भीतर दो किसानों की आत्महत्या की खबरें आई हैं. जहां एक किसान की मौत सोमवार को हुई, वहीं दूसरे ने बुधवार तड़के आत्महत्या कर ली.

यह गांव, जो मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है, की आबादी सिर्फ 1,500 है. इसके इतिहास में इतनी कम अवधि में दो आत्महत्याएं पहले कभी नहीं देखी गईं. दोनों आत्महत्याओं का कारण आर्थिक समस्याएं बताई जा रही हैं, क्योंकि पिछले कुछ सालों से उन्हें खेती में लगातार नुकसान हो रहा था. 'तेलंगाना टुडे' ने इसकी जानकारी दी.

4.5 लाख के कर्ज से परेशान किसान

बुधवार को गांव के लोग किसान रेड्डी मोहन रेड्डी (45) की मौत की खबर सुनते ही चौंक गए. लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ क्योंकि मिलनसार और हंसमुख थे. वे अपनी दो एकड़ जमीन पर धान की खेती करते थे. हाल के कुछ दिनों से मोहन रेड्डी आर्थिक तनाव में थे, और उन पर लगभग 4.5 लाख रुपये का कर्ज था. इस बीच, उनकी पत्नी भी उनकी आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें छोड़कर अपने माता-पिता के घर चली गई थी. अपने जीवन की समस्याओं को हल करने में असमर्थ होकर, रेड्डी ने अपने धान के खेत में फांसी लगा ली. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं.

आर्थिक तंगी में खुद की ली जान 

पिछले सोमवार को, नल्ला देवी रेड्डी (58) ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बताया जाता है कि इसका कारण भी आर्थिक समस्याएं थीं. देवी रेड्डी, जिनके पास चार एकड़ जमीन थी, पर पिछले कुछ सालों में कुल 10 लाख रुपये का कर्ज जमा हो गया था. उन्होंने दो साल पहले अपनी बेटी और बेटे की शादी करने के बाद एक एकड़ जमीन बेच दी थी, लेकिन फिर भी उन्हें अलग-अलग स्रोतों से लिए गए 10 लाख रुपये और चुकाने थे. 

हालांकि वे आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए एक और एकड़ जमीन बेचना चाहते थे, लेकिन अपने भाइयों के साथ जमीन के विवादों के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए. इन सभी समस्याओं के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली. एक ही गांव में एक साथ दो घटनाओं से पूरा इलाका दहल गया. यह पूरा क्षेत्र कपास की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में किसानों को कपास में नुकसान उठाना पड़ रहा है. इससे किसानों में मायूसी बढ़ रही है.

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