MSP पर SKM का बड़ा दावा, स्वामीनाथन फॉर्मूला लागू नहीं होने से धान किसानों को नुकसान

MSP पर SKM का बड़ा दावा, स्वामीनाथन फॉर्मूला लागू नहीं होने से धान किसानों को नुकसान

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने दावा किया है कि स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार MSP नहीं मिलने से धान किसानों को हर सीजन भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. संगठन ने 10 अगस्त को देशभर में 'जेल भरो', 'रेल रोको' और 'रास्ता रोको' आंदोलन का ऐलान करते हुए MSP की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन फॉर्मूले को लागू करने की मांग की है.

किसान आंदोलनकिसान आंदोलन
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 07, 2026,
  • Updated Aug 07, 2026, 9:10 AM IST

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने देश के धान किसानों को लेकर एक बड़ा दावा किया है. दरअसल, SKM ने कहा है कि धान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार नहीं मिलने की वजह से हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. संगठन का कहना है कि औसतन पांच एकड़ में धान की खेती करने वाले किसान को एक सीजन में करीब 1.50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है. इसी मुद्दे को लेकर SKM ने किसानों से 10 अगस्त को देशभर में होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है.

SKM ने अपने बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार MSP लागू करने का वादा किया था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में यह वादा पूरा नहीं किया गया. संगठन का आरोप है कि इसका सीधा नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है.

इतने लाख करोड़ से ज्यादा नुकसान का दावा

SKM के मुताबिक, अगर सास 2026-27 के लिए धान की फसल पर स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार MSP लागू नहीं किया गया, तो देशभर के धान किसानों को कुल मिलाकर करीब 3.07 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा. संगठन का कहना है कि सरकार ने इस सीजन के लिए धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार यह 3,243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था. यानी किसानों को प्रति क्विंटल 802 रुपये कम मिल रहे हैं.

क्या है A2+FL और C2+50% फॉर्मूला?

फिलहाल सरकार MSP तय करने के लिए A2+FL+50% फॉर्मूले का इस्तेमाल करती है. इसमें किसान द्वारा किए गए नकद खर्च (A2) और परिवार के श्रम (FL) की लागत जोड़कर उस पर 50 प्रतिशत लाभ दिया जाता है. वहीं, स्वामीनाथन आयोग ने C2+50% फॉर्मूला लागू करने की सिफारिश की थी. इसमें A2+FL के अलावा किसान की अपनी जमीन का अनुमानित किराया, पट्टे पर ली गई जमीन का किराया और खेती में लगी स्थायी पूंजी पर ब्याज जैसी सभी लागतें शामिल होती हैं. इसके बाद कुल लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर MSP तय किया जाता है.

10 अगस्त से देशव्यापी आंदोलन

SKM ने किसानों से 10 अगस्त को देशभर में 'जेल भरो', 'रेल रोको' और 'रास्ता रोको' जैसे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है. संगठन के अनुसार, यह आंदोलन देशभर में 1,000 से अधिक स्थानों पर आयोजित किया जाएगा. इसके बाद आंदोलन का अगला चरण 26 नवंबर से शुरू होगा. इस दौरान दिल्ली समेत देशभर के लगभग 100 स्थानों पर किसान मार्च और बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे.

पांच एकड़ वाले किसान को भारी नुकसान

SKM का दावा है कि देश में औसतन पांच एकड़ धान की खेती करने वाले किसान को हर सीजन में 1,50,064 रुपये का नुकसान होता है. संगठन के अनुसार, यह अनुमान प्रति एकड़ औसतन 22.5 क्विंटल उत्पादन के आधार पर लगाया गया है. संगठन का कहना है कि प्रति एकड़ किसानों को लगभग 30,013 रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे उनकी आय लगातार घट रही है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.

किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?

संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख मांग है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की C2+50% सिफारिश के अनुसार MSP तय करे और सभी फसलों की MSP पर खरीद की कानूनी गारंटी दे. संगठन ने कहा है कि जब तक किसानों की ये प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि ये सभी आंकड़े और दावे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा जारी बयान पर आधारित हैं. सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

PM किसान सम्मान निधि का भी किया जिक्र

SKM ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को इस योजना के तहत सालभर में 6,000 रुपये की सहायता मिलती है. लेकिन यदि सरकार स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार MSP दे, तो किसान को प्रति एकड़ लगभग 24,013 रुपये अतिरिक्त आय मिल सकती है. संगठन का कहना है कि सही कीमत मिलना किसानों का अधिकार है और यह किसी सहायता राशि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. (PTI)

MORE NEWS

Read more!