
देश की अर्थव्यवस्था को संभालने वाला किसान आज खुद बदहाली के दौर से गुजर रहा है. बुंदेलखंड के झांसी जिले में बीते दो वर्षों से लगातार आपदा, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसलें तबाह हो रही हैं, लेकिन किसानों को न तो पूरा मुआवजा मिला है और न ही फसल बीमा का वास्तविक लाभ. फसल बीमा और आपदा राहत राशि में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सैकड़ों किसान 100 किलोमीटर की पदयात्रा कर झांसी पहुंचे, जहां उन्होंने कमिश्नरी पर जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा.
झांसी भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बुंदेलखंड के अलग-अलग इलाकों से निकले किसानों ने झांसी में प्रदर्शन करते हुए फसल बीमा, आपदा राहत और भूमि अधिग्रहण में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाया. किसानों का कहना है कि खरीफ वर्ष 2024 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद उन्हें राहत राशि नाममात्र की दी गई, जबकि अधिकांश पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया.
भारतीय किसान यूनियन झांसी के जिला अध्यक्ष कमलेश लंबरदार ने बताया कि झांसी में पिछले दो वर्षों से फसल बीमा और आपदा राहत वितरण में बड़ा घोटाला हुआ है. आपदा राशि तथाकथित लोगों को बांटी गई, जबकि असली किसानों के हाथ खाली रह गए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियों और प्रशासनिक कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों के हक की राशि हड़प ली गई. इस पूरे मामले में संलिप्त किसानों, कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है. किसानों का आरोप है कि साल 2025 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में केवल 4 से 10 किसानों को ही आपदा राशि दी गई, जबकि अधिकांश प्रभावित किसान सूची से बाहर रह गए. लेखपालों पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
किसान रोनी राजा ने बताया कि लगातार अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, लेकिन बीमा कंपनियों ने किसानों को पूरा भुगतान नहीं किया. किसानों से 4400 रुपये तक बीमा प्रीमियम काटा गया, जबकि मुआवजे के नाम पर मात्र 200 से 400 रुपये ही दिए गए, जो सरासर अन्याय है. उन्होंने कहा कि बैंक मनमाने ढंग से क्लेम काट रहे हैं और बीमा कंपनियां किसानों को भ्रमित कर रही हैं.
किसान उत्तम कुमार सिंह ने बताया कि एक्सप्रेस-वे, कॉरिडोर और BIDA के तहत झांसी और जालौन क्षेत्र के 33 गांवों की जमीन कौड़ियों के दाम पर ली जा रही है. पिछले चार वर्षों में झांसी जिले में करीब एक लाख बीघा जमीन बिक चुकी है, जिससे किसान पूरी तरह तबाह हो गया है. कई गांवों को खाली करने के नोटिस दिए जा चुके हैं और किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं.
यह किसान पदयात्रा 20 तारीख को गरौठा तहसील से शुरू हुई थी, जो मार्कवा, मऊरानीपुर, गुरसराय, बरुआसागर होते हुए झांसी मंडी और कमिश्नरी पहुंची. यात्रा में करीब 1000 से अधिक किसान, महिलाएं, पुरुष, ट्रैक्टर, वाहन और डीजे के साथ शामिल रहे. किसान तिरंगा, लाठी और राशन (आटा) लेकर चल रहे हैं, जो उनके संघर्ष, आत्मसम्मान और कठिन हालात का प्रतीक है.
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा. पदयात्रा झांसी के बाद ओरछा (रामराजा सरकार) तक जाएगी. किसानों की मुख्य मांग है कि फसल बीमा और आपदा राहत की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और किसानों को पूरा और न्यायसंगत मुआवजा मिले. (अजय झा की रिपोर्ट)