
संभल में तालाब की जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई उस वक्त बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम बन गई, जब ड्यूटी पर जा रहे लेखपाल के साथ सरेआम मारपीट कर दी गई. सरकारी कर्मचारी पर हमले के बाद प्रशासन एक्टिव हुआ और जवाबी कार्रवाई में कुछ ही घंटों में बुलडोजर एक्शन पर उतर आया. कार्रवाई के दौरान तालाब से लेकर आरोपियों के गांव तक अवैध कब्जों पर कार्रवाई की गई. पूरा मामला संभल तहसील क्षेत्र के मातीपुर ग्राम पंचायत का है.
दरअसल, मातीपुर में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतों के बाद राजस्व विभाग ने पैमाइश कराई थी. पैमाइश में ग्राम प्रधान पति गजराम सिंह और उनसे जुड़े लोगों के नाम सामने आए. इसके बाद लेखपाल सुभाष चंद्र को तालाब से अवैध कब्जा हटवाने के लिए भेजा गया.
आरोप है कि जब लेखपाल सरकारी आदेश के तहत गांव की ओर जा रहे थे, तभी मनौटा पुल के पास प्रधान पति गजराम सिंह अपने तीन चार समर्थकों के साथ स्कॉर्पियो गाड़ी से पहुंचे. यहां पहले गाली-गलौच हुई और फिर लेखपाल के साथ मारपीट की गई. इस दौरान धारदार हथियार से हमला किए जाने की बात भी सामने आई, जिसमें लेखपाल घायल हो गए.
घायल लेखपाल किसी तरह मौके से निकलकर तहसीलदार कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. सरकारी कर्मचारी पर हमले की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह और एसडीएम रामानुज के निर्देश पर नायब तहसीलदार, एक दर्जन लेखपालों और भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर कार्रवाई शुरू की गई.
सबसे पहले प्रशासन की टीम मातीपुर गांव के उसी तालाब पर पहुंची, जिसे कब्जामुक्त कराने के दौरान लेखपाल से मारपीट की गई थी. मौके पर करीब चार बीघा तालाब की भूमि पर अवैध रूप से फसल बोई गई थी. घायल लेखपाल की मौजूदगी में बुलडोजर चलवाकर फसल को नष्ट कराया गया और तालाब की जमीन को कब्जामुक्त किया गया. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में रही.
तालाब से कब्जा हटाने के बाद प्रशासन का बुलडोजर एक्शन यहीं नहीं रुका. इसके बाद टीम आरोपी ग्राम प्रधान पति के गांव धततौडा पहुंची. यहां गाटा संख्या 680 पर तालाब की भूमि पर बने अवैध मकानों को चिन्हित किया गया. पैमाइश के बाद मकानों के अवैध हिस्सों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान गांव में अफरा तफरी का माहौल रहा और लोग घरों से सामान निकालते नजर आए.
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गाटा संख्या 680 पर वर्ष 2023 में धारा 67 के तहत कार्रवाई की जा चुकी थी. उस समय तीन लोगों के कब्जे सामने आए थे. एक ने कब्जा हटा लिया था, जबकि दो लोगों ने अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया. इन्हीं मामलों में अब आंशिक ध्वस्तीकरण किया गया है और शेष अवैध कब्जा हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है. वहीं, घायल लेखपाल सुभाष चंद्र ने कहा कि तालाब की पैमाइश के बाद से ही दबाव बनाया जा रहा था. सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला किया गया था. (अभिनव माथुर की रिपोर्ट)