
राजस्थान के करौली और सवाई माधोपुर जिले के किसानों के बीच पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहा विवाद अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है. गंगापुर सिटी के खंडीप गांव में नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसानों की महापंचायत गुरुवार को 14वें दिन भी जारी रही. हजारों किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी. एक ओर किसान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर बांध क्षेत्र के 39 गांवों के किसान पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं. इस टकराव के बीच प्रशासन और सरकार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
किसानों के अनुसार, करीब 200 ट्रैक्टर, कई जेसीबी मशीनें, दर्जनों जुगाड़ वाहन और डीजे के साथ निकली विशाल रैली ने पूरे इलाके में आंदोलन की ताकत का प्रदर्शन किया. दोपहर करीब साढ़े बारह बजे खंडीप रेलवे स्टेशन के निकट समपार फाटक से शुरू हुई रैली लगभग दो घंटे तक चली. इस दौरान हजारों किसान नारेबाजी करते हुए महापंचायत स्थल तक पहुंचे. रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल रहे. महापंचायत में मौजूद किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पांचना बांध का पानी कमांड क्षेत्र की नहरों में नहीं छोड़ा जाता, तब तक आंदोलन किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं किया जाएगा.
महापंचायत में किसानों ने पूर्व घोषित चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि यदि 27 जून तक सरकार ने उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 28 जून से आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो रेल रोको आंदोलन सहित बड़े जनआंदोलन की जाएगी. किसानों ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जल्दी ही नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है.
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि कमांड क्षेत्र के किसान पिछले करीब 20 वर्षों से नहरों में नियमित सिंचाई की पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. पानी के अभाव में हजारों बीघा कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है और खरीफ सीजन की बुवाई से पहले सिंचाई व्यवस्था नहीं होने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किसानों का कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आज तक उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल पाया है. संघर्ष समिति ने प्रशासन को साफ संदेश दिया कि अब केवल सरकार स्तर पर लिए गए स्पष्ट निर्णय को ही स्वीकार किया जाएगा.
पिछले कुछ दिनों से आंदोलनकारी लगातार रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे हैं. मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाओं के रेलवे ट्रैक पर पहुंचने से प्रशासन की चिंता और बढ़ गई. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.
वहीं, पांचना बांध क्षेत्र के 39 गुर्जर बहुल गांवों के लोग भी अपनी मांगों को लेकर बांध पर डटे हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीनें डूब क्षेत्र में चली गईं, लेकिन उन्हें सिंचाई का लाभ नहीं मिला. उनका कहना है कि पहले क्षेत्र की लंबित पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाए, उसके बाद ही नहरों में पानी छोड़ा जाए. ग्रामीण पिछले एक महीने से बांध पर पहरा देकर पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं. इसी कारण बांध क्षेत्र और कमांड क्षेत्र के किसानों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.
मामले में मई माह में राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को पांचना बांध का पानी कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ने के निर्देश दिए थे. बताया जा रहा है कि पिछले 20 वर्षों में यह तीसरा अवसर है जब अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है. इसके बावजूद अब तक आदेशों का पालन नहीं हो सका है.
खंडीप में चल रहे आंदोलन को कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा का समर्थन मिला है. वहीं, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा भी किसानों के पक्ष में सरकार से चर्चा कर चुके हैं. दूसरी ओर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम का कहना है कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत कर न्यायोचित समाधान निकालने का प्रयास कर रही है.
पांचना बांध का विवाद अब केवल सिंचाई पानी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी संघर्ष का रूप ले चुका है. एक ओर 35 गांवों के किसान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना और नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, तो दूसरी ओर 39 गांवों के ग्रामीण अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. अब पूरे क्षेत्र की नजरें राज्य सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं. देखना होगा कि वर्षों पुराने इस विवाद का समाधान कब निकलता है और आखिर पांचना बांध का पानी किसानों के खेतों तक कब पहुंच पाता है. (मनोहर लाल गुप्ता की रिपोर्ट)