
महाराष्ट्र में किसान सभा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक के बाद अकोले से मुंबई तक निकाले जा रहे वाहन मार्च को स्थगित कर दिया है. किसान सभा के मुताबिक, सरकार ने किसानों और आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया है. इन आश्वासनों पर कितना अमल हुआ, इसकी समीक्षा के लिए 4 नवंबर को फिर बैठक होगी. यह वाहन मार्च 26 अक्टूबर को शुरू हुआ था, लेकिन इसे ठाणे जिले के शहापुर में रोक दिया गया था. इसके बाद किसान सभा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों के साथ मुलाकात की.
किसान सभा के अनुसार, सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तय नियमों से अलग अतिरिक्त सहायता देने का आश्वासन दिया है. इसके अलावा, नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना की दो लंबित किस्तें जारी करने की बात भी कही गई है. नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को मिलने वाली 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग पर भी चर्चा होगी. मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को कर्ज माफी उप-समिति के सामने रखने की बात कही है. सरकार ने संकट में चल रही लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के कर्ज माफ करने का फैसला लेने की जानकारी भी दी. इससे जुड़ी योजनाओं पर निर्भर किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है.
किसान सभा ने बाल हिरडा यानी बहेड़ा फल की खरीद के लिए अध्ययन समूह बनाने की मांग उठाई. सरकार ने इस पर समूह बनाने और उसमें किसान सभा के प्रतिनिधियों को शामिल करने का आश्वासन दिया है. बैठक में आदिवासी समुदाय को भंडारादरा बांध का पानी उपलब्ध कराने और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (इको-सेंसिटिव जोन) को खत्म करने की मांग पर भी चर्चा हुई.
बैठक में महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना का लाभ नहीं पा रहीं महिलाओं का मुद्दा भी उठा. किसान सभा के अनुसार, अधूरी KYC के कारण योजना से बाहर हुईं करीब 81 लाख लाभार्थी महिलाओं को दोबारा शामिल करने पर सरकार सकारात्मक फैसला लेने पर विचार करेगी. सरकार ने यह भी भरोसा दिया कि जिन महिलाओं की KYC पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना का पैसा नहीं मिल रहा है, उनका भुगतान जल्द शुरू कराया जाएगा.
बैठक में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि मंदिरों की जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में किसानों के नाम दर्ज करने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है. इस संबंध में प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने वाली समिति में किसान सभा के प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा. चरागाह भूमि पर खेती करने वाले किसानों के मामले में सरकार पात्रता तय करने के लिए एक कट-ऑफ अवधि निर्धारित करेगी. इसके बाद इस मुद्दे पर दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही गई है. निर्माण श्रमिकों की मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति योजना और उन्हें मिलने वाले व्यक्तिगत लाभों के स्वरूप पर भी चर्चा हुई. सरकार ने इन्हें केंद्र के नए श्रम कानूनों के अनुरूप तय करने की बात कही.
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, कई मंत्री, विभागीय सचिव और पुलिस अधिकारी मौजूद थे. किसान सभा की ओर से डॉ. अशोक धवले, जे.पी. गावित, विधायक विनोद निकोले और डॉ. अजीत नवाले सहित अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. फिलहाल, मुख्यमंत्री से मिले आश्वासनों के बाद किसान सभा ने वाहन मार्च स्थगित कर दिया है. अब 4 नवंबर की बैठक में यह समीक्षा की जाएगी कि सरकार ने मांगों पर कितना काम किया है. फिलहाल कई मुद्दों पर आश्वासन मिला है, जबकि कुछ मांगों पर आगे फैसला होना बाकी है. (PTI)