
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए बेहतर दाम और बकाया भुगतान की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने राज्य सरकार से गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करने की मांग की है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन तेज करें और सरकार पर दबाव बनाएं. शुक्रवार को लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में आयोजित ‘किसान मजदूर पंचायत’ को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि किसानों को गन्ने का उचित भाव मिलना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं, तो गन्ने के दाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि किसानों को अपनी मांगें पूरी कराने के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी होगी.
राकेश टिकैत ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में गन्ने का भाव भी बढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने पिछली सरकारों के दौरान गन्ने के भाव में 40 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए सवाल किया कि मौजूदा सरकार भी किसानों को राहत क्यों नहीं दे सकती. उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने लिखित रूप में रखें और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें. टिकैत ने यह भी कहा कि गन्ना, धान, आलू और मक्का उगाने वाले किसानों को अलग-अलग होने के बजाय एकजुट होकर अपने मुद्दे उठाने चाहिए.
किसान पंचायत में टिकैत ने धान खरीद का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को अपनी उपज अपेक्षित कीमत से करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचनी पड़ रही है. उन्होंने सरकार से मांग की कि धान की खरीद समय पर हो और किसानों को उनकी उपज का भुगतान भी जल्द मिले. इसके अलावा उन्होंने चीनी मिलों पर किसानों के बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा उठाया. टिकैत ने बजाज समूह की मिलों सहित अन्य चीनी मिलों से बकाया राशि चुकाने की मांग की. उन्होंने सिम्भावली चीनी मिल का भी जिक्र किया, जहां किसानों का पैसा बकाया बताया गया है. उनका सुझाव था कि जो मिलें बंद पड़ी हैं, उन्हें नए मालिकों को सौंपकर दोबारा चलाने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों का भुगतान किया जा सके.
राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में किसानों को कम मुआवजा मिला है, वहां दरों की समीक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने 2013 के भूमि अधिग्रहण नियमों के आधार पर मुआवजा देने की मांग उठाई. उन्होंने प्रदर्शन के लिए जगह मिलने में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र किया. टिकैत के मुताबिक, किसानों के लिए अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना मुश्किल होता जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का समर्थन किया. उन्होंने आशंका जताई कि बिजली वितरण के निजीकरण का असर किसानों और दूसरे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. (PTI)