
धान के मौजूदा कटाई सीजन में वायु प्रदूषण को रोकने और पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कपूरथला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है. उप-मंडल सुल्तानपुर लोधी में नियमों का उल्लंघन कर खेत में पराली जलाने के आरोप में इस सीजन की पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है. यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि इस बार पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक मशीनरी बेहद मुस्तैद और सक्रिय भूमिका निभा रही है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर लोधी के 'लौ सवाल' गांव के निवासी गुरविंदर सिंह नामक एक स्थानीय किसान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) के तहत मामला दर्ज किया गया है. किसान पर धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों (पराली) में आग लगाने का आरोप है.
उप-मंडलाधिकारी (SDM) जसजीत सिंह और सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) धीरेंद्र वर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC), लुधियाना से सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं, जिनमें क्षेत्र में आग लगाने की घटना दर्ज हुई थी. सैटेलाइट अलर्ट के तुरंत बाद संबंधित नोडल अधिकारियों और क्लस्टर अधिकारियों की टीम ने मौके पर जाकर जमीनी स्तर पर निष्पक्ष जांच की. जांच में पराली जलाने की पुष्टि होने के बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई. इस पूरे इलाके में पराली जलाने के खिलाफ दिवाली से ठीक पहले की गई यह अपनी तरह की पहली सख्त कार्रवाई है.
आमतौर पर दिवाली के आसपास के दिनों में पराली जलाने की घटनाओं में काफी इजाफा देखने को मिलता है. इस दौरान गिरते तापमान और पटाखों के धुएं के साथ पराली का धुआं मिलकर 'स्मॉग' (घातक धुंध) का रूप ले लेता है, जिससे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है.
इसे ध्यान में रखते हुए कपूरथला प्रशासन ने उप-मंडल के उन सभी गांवों को चिन्हित किया है, जहां बीते वर्षों में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं. इन 'हॉटस्पॉट' गांवों में विशेष जागरुकता सह निगरानी अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में बुधवार को भिला गांव में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके अपनाने की सलाह दी गई.
SDM और ASP ने दोहराया कि जिला प्रशासन सैटेलाइट मॉनिटरिंग और मैदानी गश्त के जरिए पूरे क्षेत्र पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहा है. नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य के हित में पराली जलाने से बचें, फसल अवशेषों का मशीनी या अन्य सुरक्षित तरीकों से निपटारा करें और प्रदूषण-मुक्त वातावरण बनाने में प्रशासन का पूरा सहयोग करें.