
उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जनपद लंबे समय से आलू उत्पादन का गढ़ माना जाता है. खेती के नजर से यहां की जमीन अधिक उपजाऊ है. इस जिले की पहचान उन्नत खेती और मेहनती किसानों से है. किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के किसान तक द्वारा चलाए जा रहे किसान कारवां जनपद के ब्लॉक मोहम्मदाबाद स्थित पुठरी गांव पहुंचा. प्रदेश के 75 जिलों की कवरेज के तहत यह किसान कारवां का 12वां पड़ाव रहा, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया.
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. किसानों को आलू की उन्नत किस्मों, बीज चयन, मिट्टी परीक्षण, संतुलित खाद व उर्वरक प्रबंधन, रोग और कीट नियंत्रण, साथ ही आधुनिक खेती की तकनीकों की खास जानकारी दी गई.
कृषि विज्ञान केंद्र फर्रुखाबाद के प्रभारी डॉ. अभिमन्यू यादव ने कहा कि आज किसानों को मिट्टी बचाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि ग्रीन कंपोस्ट के प्रयोग से मिट्टी की पोषकता बढ़ती है, जिससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होती है बल्कि मिट्टी भी सुरक्षित रहती है.
कृषि विज्ञान केंद्र की पर्यावरण विज्ञानी गुंजा जैन ने बताया कि आधुनिक समय में कृषि को विज्ञान से जोड़ना बेहद जरूरी है. ड्रिप इरिगेशन और फसल सुरक्षा चक्र अपनाने से मिट्टी और हवा प्रदूषण से फसलों की रक्षा की जा सकती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि जानकारी के अभाव में कीटनाशक और रासायनिक उर्वरकों की खरीद में ठगी से बचें और जागरूक किसान बनें.
केवीके के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि फर्रुखाबाद जनपद प्रदेश में सर्वाधिक आलू उत्पादन करता है, लेकिन अत्यधिक निर्भरता के कारण किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं. उन्होंने जानकारी दी कि रूस के साथ हुए करार में कुफरी सूर्या किस्म के आलू के 20 लाख टन के ऑर्डर से किसानों को लाभ मिलेगा. साथ ही उन्होंने मक्का की खेती को बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि देश में मक्का की मांग अधिक है, जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप कुमार ने अत्यधिक यूरिया और डीएपी के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने की बात कही. उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है. उन्होंने बताया कि 1 लीटर पानी में 5 एमएल नैनो यूरिया का छिड़काव शाम 3 से 6 बजे के बीच करना चाहिए.
प्रगतिशील किसान सुधांशु गंगवार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पहले रासायनिक खेती करते थे, लेकिन उसके खराब परिणाम देखने के बाद पिछले 15 वर्षों से प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन बेहतर हुआ है और आय लगभग दोगुनी हो चुकी है.
कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र ने पशुओं के पोषण पर जानकारी देते हुए बताया कि मिनरल की पूर्ति से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है, दूध उत्पादन बढ़ता है और गर्भाधान में भी सुधार आता है.
चंबल फर्टिलाइजर के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि कंपनी के उत्तम प्रणाम और उत्तम माइक्रो राजा जैसे उत्पाद मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और फसलों को सुरक्षा प्रदान करते हैं.
उप कृषि निदेशक अरविंद मिश्रा ने किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि रक्षा से जुड़ी दवाएं 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे समय-समय पर कृषि विभाग की वेबसाइट और कार्यालय से संपर्क करें.
कृषि विशेषज्ञ सलमान ने कहा कि मेड़ को बहुत पतला करना नुकसानदायक है. चौड़ी मेड़ होने से खेतों में बीमारियों का प्रकोप कम होता है. किसानों को दूसरों की नकल करने के बजाय वैज्ञानिक सलाह पर खेती करनी चाहिए.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें पांच ₹500 के पुरस्कार, ₹2000 का द्वितीय पुरस्कार आलोक कुमार को और 3000 रुपये का प्रथम पुरस्कार सिद्धांत को प्रदान किया गया.
किसानों ने कहा कि किसान कारवां जैसे कार्यक्रमों से उन्हें सीधे विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलता है, जिससे खेती अधिक लाभकारी बन रही है. यह अभियान प्रदेश में आधुनिक और अच्छी खेती की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है.
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान।
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना।
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में।
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान—सभी के लिए।
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी।
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं।
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है।
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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