
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड डील को लेकर 'ऑल इंडिया किसान सभा' (AIKS) ने विरोध जताया है. संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार इस समझौते को आगे बढ़ाती है, तो किसान इसका कड़ा विरोध करेंगे. किसान सभा का कहना है कि अमेरिका को कृषि क्षेत्र में ज्यादा छूट देने से भारतीय किसानों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं और खेती में बड़ी कंपनियों का दखल बढ़ सकता है.
एक बयान में AIKS ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित व्यापार समझौते को खारिज करने की मांग की है. संगठन के मुताबिक, अमेरिका में किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है. ऐसे में भारतीय किसानों के लिए अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है.
किसान सभा ने खास तौर पर सोयाबीन की खेती को लेकर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि अगर भारत-अमेरिका समझौते के तहत सोयाबीन से जुड़े उत्पादों के आयात में छूट दी जाती है, तो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक के किसानों पर इसका असर पड़ सकता है. संगठन के मुताबिक, सस्ती दरों पर विदेशी उत्पाद आने से घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
AIKS ने भारत के डेयरी बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने की आशंका पर भी सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पादों को ज्यादा छूट के साथ भारतीय बाजार में आने दिया गया, तो देश के दूध उत्पादकों को नुकसान हो सकता है. इससे स्थानीय स्तर पर दूध और दूसरे डेयरी उत्पादों की खरीद कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है.
किसान सभा ने कहा कि प्रस्तावित समझौते से मक्का, ज्वार, कपास और बादाम, अखरोट और सेब उगाने वाले किसानों के सामने भी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं. संगठन का मानना है कि विदेशी कृषि उत्पादों को अधिक छूट मिलने से भारतीय किसानों की आमदनी प्रभावित हो सकती है.
किसान सभा ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में की गई कटौती की भी आलोचना की. संगठन के अनुसार, सरकार ने सितंबर में कच्चे सोयाबीन तेल और पाम तेल पर मूल आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था. रिफाइंड तेलों के शुल्क में भी कटौती की गई थी. AIKS का कहना है कि यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब किसान खरीफ सोयाबीन की कटाई शुरू कर रहे थे.
AIKS ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते की जानकारी संसद के साथ पर्याप्त रूप से साझा नहीं की गई है. संगठन ने अमेरिकी अधिकारियों और भारतीय सरकार के बीच जारी बातचीत को लेकर भी चिंता जताई. उसके मुताबिक, समझौते में कृषि उत्पादों और डेयरी बाजार से जुड़े प्रावधान भारतीय किसानों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं. किसान सभा ने अपनी राज्य और स्थानीय इकाइयों से इस मुद्दे पर लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील की है. साथ ही, संगठन ने किसानों से 23 अक्टूबर को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है. यह मार्च चुनावों में कथित हेरफेर के विरोध में आयोजित किया जा रहा है. (PTI)