
इटावा जनपद कृषि की दृष्टि से बेहद समृद्ध माना जाता है. उपजाऊ भूमि, मेहनती किसान और उन्नत फसल उत्पादन इसकी पहचान हैं. किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से इंडिया टुडे ग्रुप के किसान तक द्वारा चलाया जा रहा किसान कारवां आज इटावा जनपद के सेहुआ गांव पहुंचा. प्रदेश के 75 जनपदों की कवरेज के तहत यह किसान कारवां का 13वां पड़ाव है. कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की और कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया.
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत बीज, मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, फसल संरक्षण और आधुनिक खेती की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी. वैज्ञानिकों ने बताया कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है. वहीं किसानों ने भी अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए, जिनका विशेषज्ञों ने मौके पर समाधान दिया. कार्यक्रम से जहां किसानों को नई दिशा मिली, वहीं कृषि वैज्ञानिक भी स्थानीय खेती की चुनौतियों को समझकर काफी कुछ सीखकर लौटे.
किसान कारवां के मंच से जिला कृषि अधिकारी रामनारायण सिंह ने किसानों के हित में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि आज किसान अत्यधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे फसलों में बीमारियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि इसका असर केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वही अनाज खाने से मानव स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है और मृदा का स्वास्थ्य भी लगातार गिर रहा है. ऐसे में किसानों को गोबर की खाद का अधिक उपयोग, सीमित मात्रा में रासायनिक खाद और उन्नत बीजों के प्रयोग पर जोर देना चाहिए.
किसान कारवां के दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम.के. सिंह ने बताया कि इटावा के किसान फिलहाल धान (बासमती), आलू और गेहूं जैसी कुछ ही फसलों पर निर्भर हैं, जिनसे अपेक्षित आमदनी नहीं हो पा रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि किसान सब्जियों की खेती की ओर रुख करें, क्योंकि बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है. साथ ही उन्होंने खेत में ग्रीन कंपोस्ट के रूप में ढैचा का उपयोग करने की सलाह दी, जिससे मिट्टी उर्वर बनेगी और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र इटावा के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल ने कहा कि प्रकृति ने हमें जो संपदा दी है, उसका सही उपयोग करके न केवल अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि मृदा का स्वास्थ्य भी बेहतर बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि किसान अक्सर आवश्यकता से अधिक रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, जिससे उत्पादन नहीं बढ़ता और मिट्टी की सेहत खराब होती है. उन्होंने देशी बीजों और प्राकृतिक खरपतवार जैसे बथुआ के महत्व पर भी प्रकाश डाला.
किसान कारवां के चौथे चरण में सहायक विकास अधिकारी ने किसानों को फॉर्म रजिस्ट्री के महत्व के बारे में बताया. साथ ही उन्होंने कीटनाशकों के प्रयोग के दौरान बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि किसान नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं और फसल के साथ-साथ उत्पादन को भी सुरक्षित रखते हैं.
कार्यक्रम में मंच से जादूगर सलमान ने मनोरंजक अंदाज में किसानों को गलत खेती के दुष्परिणाम समझाए. उन्होंने बताया कि गलत खेती से खेत और इंसान दोनों बीमार हो रहे हैं. जादू के माध्यम से उन्होंने किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह मानने, अच्छे बीजों के प्रयोग और गोबर की खाद के अधिक उपयोग का संदेश दिया. उनके जादू ने किसानों और महिलाओं को खूब गुदगुदाया.
किसान कारवां के अंतिम चरण में किसानों के लिए लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें ₹500 के 10 लकी ड्रा निकाले गए. इसके अलावा द्वितीय पुरस्कार के रूप में सुरेंद्र कुमार को ₹2000 और प्रथम पुरस्कार के रूप में अजय कुमार को ₹3000 की इनाम राशि प्रदान की गई. कुल मिलाकर, किसान कारवां का यह पड़ाव इटावा के किसानों के लिए ज्ञान, संवाद और नवाचार का एक सशक्त मंच साबित हुआ, जिससे किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती की नई दिशा मिली.
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान।
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना।
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में।
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए।
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी।
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं।
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है।
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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