
बिहार में लंबे समय तक किसानों के समर्थन में बड़े स्तर पर आंदोलन कम ही देखने को मिले हैं, लेकिन अब संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. SKM ने आरोप लगाया है कि राज्य में प्रस्तावित सेटेलाइट टाउनशिप समेत कई विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर SKM ने आंदोलन तेज करने और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए उम्मीदवार के खिलाफ अभियान चलाने का ऐलान किया है.
पटना में 18 जुलाई को स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक परिसर में आयोजित SKM, बिहार के चिंतन शिविर में सैकड़ों किसान नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए उम्मीदवार को हराने के लिए गांव-गांव और घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा. इसके लिए 23, 24 और 25 जुलाई को प्रभावित किसानों का बड़ा जत्था बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लोगों से संपर्क करेगा और किसानों के मुद्दों को जनता तक पहुंचाएगा.
संयुक्त किसान मोर्चा ने 22 जुलाई को अमेरिकी ट्रेड डील के विरोध में देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का समर्थन किया है. बिहार में SKM ने फैसला लिया है कि 22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी पुतला जलाया जाएगा. किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं और इसी के विरोध में यह प्रदर्शन किया जाएगा.
SKM का कहना है कि बिहार को सेटेलाइट टाउनशिप नहीं बल्कि 'स्मार्ट गांव' की जरूरत है. किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की पुश्तैनी जमीन लेकर कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपना चाहती है. उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में बिहार का विकास चाहती है, तो उसे बाढ़ और सूखे की स्थायी समस्या का समाधान करना चाहिए, गांवों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, ताकि बड़ी संख्या में बाहर काम करने गए बिहारियों को वापस लाया जा सके.
संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप, भारतमाला सड़क परियोजना, चौसा थर्मल पावर, रेलवे विस्तार, पिपराकोठी वाटर पार्क और बांका में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना जैसी योजनाओं के लिए करीब पांच लाख एकड़ उपजाऊ खेती की जमीन प्रभावित हो सकती है. SKM का कहना है कि किसानों के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका, पहचान और भविष्य का आधार है. खेती उनके जीवन, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है, इसलिए जमीन अधिग्रहण के फैसले किसानों की सहमति के बिना नहीं होने चाहिए.
बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि दिल्ली किसान आंदोलन की तर्ज पर बिहार में भी शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत आंदोलन चलाया जाएगा. किसानों, बटाईदारों, खेतिहर मजदूरों और खेती-किसानी पर निर्भर सभी वर्गों को एकजुट कर गांव-गांव अभियान चलाने का फैसला लिया गया है. SKM का कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव के जरिए किसान अपना विरोध दर्ज कराएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे.
बैठक में किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह, दिनेश कुमार, अमेरिका महतो, जनक देव सिंह, बैजनाथ सिंह, मो. शाहिद कमाल, ई. अनिल कुमार समेत कई किसान नेताओं ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान नेता देव कुमार ने की. उन्होंने किसानों और खेतिहर मजदूरों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करने और आंदोलन को तेज करने की अपील की.