
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार को अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) यानी ट्रेड डील पर साइन न करने की चेतावनी दी है. साथ ही, देश भर के किसानों से कहा कि अगर ऐसा कोई समझौता होता है, तो वे उसके अगले दिन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार रहें. यह फैसला SKM की नेशनल काउंसिल की बैठक में लिया गया. बैठक में 10 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा भी की गई.
इस आंदोलन की मुख्य मांगें, C2 प्लस 50 प्रतिशत के फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और पक्की खरीद, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को रद्द करना और किसानों का पूरा कर्ज माफ करना है. C2 प्लस 50 प्रतिशत फार्मूला, स्वामीनाथन कमीशन द्वारा सुझाया गया कृषि मूल्य निर्धारण का एक मानक है, जिसका मकसद भारत में फसलों के लिए सही MSP तय करना है. C2 का मतलब है 'कॉम्प्रिहेंसिव कॉस्ट' यानी कुल लागत.
किसान संगठन ने कहा कि अगर सरकार भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन करती है, तो राज्य समन्वय समितियां और सदस्य संगठन विरोध प्रदर्शन के तरीके और जगह तय करेंगे. वहीं, इस अभियान के तहत, SKM 10 अगस्त को देशव्यापी विरोध दिवस के रूप में मनाएगा. इस दौरान राज्यों में रेल रोको, रास्ता रोको और जेल भरो जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. संगठन ने कहा कि आंदोलन की पूरी जानकारी राज्य इकाइयों और सदस्य संगठनों द्वारा तय की जाएगी.
SKM ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी कृषि-व्यवसाय वाली मल्टीनेशनल कंपनियों और घरेलू कॉर्पोरेट समूहों के फायदे के लिए 'गलत' MSP घोषित किया है. साथ ही, सरकार खरीद व्यवस्था को कमजोर कर रही है और फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और साइलो (अनाज भंडारण केंद्र) पर कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा दे रही है.
किसान संगठन ने बढ़ती कीमतों और यूरिया, डीजल और कुकिंग गैस की कथित कालाबाजारी के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की. संगठन ने अपनी पुरानी मांगों को फिर से दोहराया, जिसमें सालाना 200 दिन के काम और 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के साथ ग्रामीण रोजगार की गारंटी, और कैजुअल प्रवासी मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रति माह करना है.
अपने अभियान के अगले चरण की योजना बनाने के लिए, SKM 28 जुलाई को नई दिल्ली में एक अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें राज्य और जिला स्तर के नेता शामिल होंगे. संगठन ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर 29 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में मजदूरों और किसानों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की है.
इसके अलावा, संगठन ने पानी के अधिकारों और बढ़ते जल संकट पर एक विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया, ताकि एक अपडेटेड पॉलिसी और एक्शन प्लान तैयार किया जा सके. SKM ने हिसार में पानी की कमी को लेकर चल रहे आंदोलन, छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट के विरोध और ओडिशा में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासी आंदोलनों को भी अपना समर्थन दिया. इस बैठक की अध्यक्षता संगठन के नेताओं ने की, जिनमें हन्नान मोल्लाह, दर्शन पाल और सुनीलम शामिल थे. (PTI)