बूढ़े किसान को मरा बताकर कई लोगों के नाम कर दी 2.5 एकड़ जमीन, CM हेल्‍पलाइन से भी नहीं मिली मदद

बूढ़े किसान को मरा बताकर कई लोगों के नाम कर दी 2.5 एकड़ जमीन, CM हेल्‍पलाइन से भी नहीं मिली मदद

मध्‍य प्रदेश के खरगोन जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले 95 वर्षीय किसान को अपने जिंदा होने के सबूत देने पड़ रहे हैं, लेकिन दफ्तर-दफ्तर भटकने के बाद भी उन्‍हें अपनी जमीन वापस नहीं मिल रही है. पीड़ि‍त ने सीएम हेल्‍पलाइन पर भी शिकायत की थी, लेकिन वहां से कोई मदद नहीं मिली.

Khargone Farmer Land DisputeKhargone Farmer Land Dispute
उमेश रेवलिया
  • Khargone,
  • Dec 25, 2024,
  • Updated Dec 25, 2024, 1:33 PM IST

मध्य प्रदेश के खरगोन में सिस्टम की अनदेखी के कारण 95 वर्ष के बुजुर्ग किसान को अपनी जमीन के लिए जिंदा होने का प्रमाण देना पड़ रहा है. दरअसल, जिले में बुजुर्ग को मृत बताकर ढाई एकड़ जमीन दूसरों के नाम करने का मामला सामने आया है. चार साल पहले गांव के एक व्यक्ति बुधा की मौत हुई थी और बुजुर्ग बुटिया को कागजों पर मृत बता दिया गया. मजबूर वृद्ध अपनी ढाई एकड़ जमीन वापस लेने के लिए पिछले एक साल से तहसीलदार से लेकर सीएम तक गुहार लगा रहा है. पीड़ित बुजुर्ग ने अब प्रधानमंत्री मोदी से कहा है, "मैं जिंदा हूं मुझे जमीन दिलाएं."

पि‍ता का नाम मैच होने से हुई गड़बड़ी

खरगोन जिले से महज 40 किमी दूर कसरावद तहसील के छोटे से गांव डोलानी में करीब 95 वर्षीय किसान बुटिया पिता फाटला भी सिस्टम के आगे परेशान होकर परीक्षा से गुजर रहा है. गांव में बुधा पिता फाटला की मौत हुई है, लेकिन बुटिया फाटला को मृत मानकर उसकी अलग-अलग टूकड़ों में ढाई एकड़ जमीन को राजस्व विभाग ने दूसरे लोगों के नाम पर नामांतर‍ित कर दिया है.

बुजुर्ग बुटिया कहते हैं कि खुद को जीवित साबित करना पड़ रहा है, लेकिन कोई अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं. बुटिया ने बताया कि खसरा नंबर 17/6, 21/2, 56/3 बुटिया पुत्र फाटला जाति भिलाला निवासी डोलानी के नाम से पावती बनी हुई है और वे कई वर्षों से उसपर खेती करते आ रहे हैं. उनके नाम से दर्ज जमीनों को बुटिया को मृतक बताकर दूसरों के नाम पावती पर चढ़ा दिया गया है.

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सीएम हेल्‍पलाइन से भी नहीं मिली मदद

बुटिया ने जमीन के लिए ग्राम पंचायत से लेकर तहसीलदार कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक गुहार लगाई है, लेकिन खुद को जीवित साबित करने में विफल साबित हो रहे हैं. बूटिया फटाला अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुहार लगा रहे हैं क‍ि वह जिन्दा हैं और उन्‍हें उनकी जमीन दिलाई जाए.

दफ्तरों के चक्‍कर काट रहे दादा-पोते

पीड़‍ित के पोते बहादुर ने कहा कि ये मेरे दादा बुटिया फाटला के नाम अलग-अलग जगह ढाई एकड़ जमीन है. गांव में बुधा पुत्र फाटला भी है. कुछ साल पहले उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद मेरे दादा बुटिया के नाम की जमीन बुधा फाटला के रिश्तेदारों ने अपने नाम करवा ली है. एक साल से मैं और दादा अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. अधिकारियों ने बिना जांच किए ही शिकायत बंद करा दी है.

SDM ने लिया मामले का संज्ञान

वहीं, इस मामले में एसडीएम ने फोन पर चर्चा में बताया कि तहसीलदार से जानकारी जुटाएंगे. एक साल में उसके नाम की जमीन कब दूसरे किसान के नाम पर हुई है. इसकी जानकारी लेंगे किसान को बुलाएंगे. कसरावद के तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव का कहना है अभी-अभी मुझे मामले की जानकारी मिली है कि इस तरह की त्रुटि हुई है. मामले में पता चला है कि बूटिया और बुधा दोनों के पिता का नाम फाटला है. 2010 में कंप्यूटरीकरण के दौरान हस्तलिखित खसरे को कंप्यूटरीकृत करने के समय उसमें कुछ गड़बड़ी हुई. हम इसकी जांच कर रहे हैं. दो-चार दिन में इसे ठीक करा लेंगे.

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