Wheat Price: गेहूं भाव में गिरावट का सिलसिला जारी, मार्च में इतनी गिरी कीमत, नई फसल को लेकर चिंता में किसान

Wheat Price: गेहूं भाव में गिरावट का सिलसिला जारी, मार्च में इतनी गिरी कीमत, नई फसल को लेकर चिंता में किसान

देशभर की मंडियों में गेहूं के भाव लगातार नरम पड़ रहे हैं और मार्च के पहले हफ्ते में ही औसत कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. कई राज्यों में बाजार भाव एमएसपी के आसपास या उससे नीचे पहुंच गए हैं, जबकि नई फसल की आवक भी शुरू होने वाली है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ती दिख रही है.

Wheat price declineWheat price decline
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Mar 08, 2026,
  • Updated Mar 08, 2026, 7:00 AM IST

देशभर की मंडियों में गेहूं की कीमतें लगातार नरम पड़ रही हैं और नई फसल की आवक शुरू होने से पहले ही बाजार भाव दबाव में आ गए हैं. फसल का एमएसपी से भी कम भाव मिलने से किसान निराश हैं. एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्‍ध प्राइस ट्रेंड डेटा के मुताबिक, मार्च के पहले हफ्ते (1 से 8 मार्च 2026) में देश में गेहूं की औसत थोक कीमत घटकर 2,458 रुपये प्रति क्विंटल रह गई, जो एक हफ्ते पहले 2,566 रुपये थी. यानी सिर्फ सात दिनों में करीब 107 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज हुई है. राज्यवार आंकड़े देखें तो छत्तीसगढ़ में हफ्तेभर में सबसे ज्‍यादा करीब 26.1 प्रतिशत गिरावट रही. 

इसके अलावा दिल्ली में 10.2%, महाराष्ट्र में 4.7%, राजस्थान में 3.9% और मध्य प्रदेश में गेहूं की औसत कीमत में 3.4% की कमी दर्ज की गई. उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी हल्की गिरावट देखी गई. हालांकि कर्नाटक में इस दौरान करीब 2.3% की मामूली बढ़ोतरी रही.

एमएसपी से नीचे जा रहे भाव, किसानों की चिंता बढ़ी

मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपये प्रति क्विंटल है. कई राज्यों में बाजार भाव इस स्तर के आसपास या उससे भी नीचे खिसक चुके हैं. वहीं, नई फसल के लिए घोषित रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 का एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है यानी पिछले एमएसपी से 160 रुपये अधिक. लेकिन, मौजूदा बाजार भाव इस नए एमएसपी से काफी नीचे बने हुए हैं. ऐसे में किसानों में नई उपज के सही दाम को लेकर भी चिंता बनी हुई है.

मासिक और सालाना आधार पर भी नरमी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मासिक स्तर पर भी गेहूं के भाव की स्थित‍ि चिंताजनक रही. फरवरी 2026 में देश में गेहूं का औसत थोक भाव 2,622 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि जनवरी 2026 में यह 2,672 रुपये था यानी एक महीने में करीब 50 रुपये की गिरावट. महाराष्ट्र में 9.7%, गुजरात में 5.9%, राजस्थान में 6.1% और मध्य प्रदेश में 5.8% की मासिक गिरावट दर्ज हुई. वहीं, हरियाणा और बिहार में भी 4 से 5 प्रतिशत की कमी रही.

यह हाल तब रहा जब सरकार ने फरवरी की शुरुआत में ही गेहूं के भंडारण पर लगी लिमिट हटा दी थी और 13 फरवरी को 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति भी जारी कर दी थी. साप्‍ताहिक और मासिक गिरावट के अलावा सालाना आधार पर भी गेहूं भाव का हाल बुरा है. आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2025 में देश की औसत थोक कीमत 2,830 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो फरवरी 2026 में घटकर 2,622 रुपये रह गई. मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में गेहूं की औसत कीमत में सालाना आधार पर दो अंकों तक की गिरावट देखी गई है.

आगे और दबाव की आशंका

बता दें कि इस साल गेहूं का रिकॉर्ड उत्‍पादन होने का अनुमान है. ऐसे में नई फसल की आवक से पहले ही कीमतों में यह नरमी आगे और गिरावट का संकेत दे रही है. मार्च में आगे और अप्रैल में जैसे-जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों- पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गेहूं की कटाई तेज होगी और मंडियों में आवक बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है. अंत में किसानों के लिए सरकारी खरीद ही एक आखिरी रास्‍ता हो सकता है, जहां उन्‍हें एमएसपी नसीब होगा. 

सरकारी खरीद से सहारे की आस

बता दें कि राजस्‍थान में जल्‍द सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है. ऐसे में किसान निजी व्‍यापारियों को फसल बेचने की बजाय सरकारी केंद्रों पर अपनी फसल बेचने में रुचि लेंगे. वहीं, मध्‍य प्रदेश में 10 मार्च तक किसानों के रजिस्‍ट्रेशन चलेंगे और संभव है कि बहुत जल्‍द खरीद की तारीख का भी ऐलान हो जाए. साथ ही मध्‍य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी यह भी है कि उन्‍हें 40 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्‍त बोनस राशि मिलेगी.

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