
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा मंडी परिसर में अचानक हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा किसानों का हजारों क्विंटल धान बारिश में भीग गया. किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत और कर्ज के दबाव से परेशान हैं. अब बारिश से फसल खराब होने के खतरे ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. किसानों का आरोप है कि निकाय चुनाव की मतगणना के चलते उन्हें मंडी परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया. ऐसे में वे समय रहते मंडी में पहुंचकर खुले में रखे धान को बारिश से बचाने की व्यवस्था नहीं कर पाए. किसानों का कहना है कि अगर उन्हें मंडी में जाने दिया जाता तो वे अपनी फसल को ढककर या सुरक्षित स्थान पर रख सकते थे.
किच्छा मंडी में बड़ी संख्या में किसान अपनी धान की फसल लेकर पहुंचे थे. मंडी परिसर में धान को सूखने के लिए खुले में रखा गया था. सूखने के बाद इसकी तुलाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही अचानक बारिश शुरू हो गई. बारिश के कारण खुले में पड़ा धान भीग गया. अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती धान को दोबारा सुखाने और उसकी क्वालिटी बचाने की है. अगर धान ज्यादा समय तक गीला रहा तो इसके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है.
पीड़ित किसानों का कहना है कि मंडी में धान खुले में पड़ा था और उन्हें पहले से ही बारिश का डर था. लेकिन निकाय चुनाव की मतगणना के कारण मंडी परिसर में किसानों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी. किसानों का आरोप है कि अगर उन्हें मंडी में प्रवेश करने की अनुमति मिलती तो वे अपनी फसल को सुरक्षित कर सकते थे. अब बारिश के बाद किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है. धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और दूसरी जरूरतों पर काफी पैसा खर्च होता है. इसके बावजूद किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिलने में परेशानी होती है. एक तरफ किसान लागत और कर्ज के दबाव से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौसम की मार ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि अगर धान खराब हुआ तो उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
बारिश के बाद किसान प्रशासन से नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग कर रहे हैं. किसानों का सवाल है कि मंडी में उनकी फसल भीगने से हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा. अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है. अगर समय रहते भीगे हुए धान को सुखाने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं की गई तो नुकसान और बढ़ सकता है.