धीमी पड़ी गेहूं खरीद: बारिश, देरी और सख्त नियमों के बीच MSP अभियान पर असर

धीमी पड़ी गेहूं खरीद: बारिश, देरी और सख्त नियमों के बीच MSP अभियान पर असर

2026-27 के मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद सुस्त बनी हुई है, जिसकी वजह बेमौसम बारिश, देरी से कटाई और सख्त क्वालिटी मानक हैं. पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में खरीद कम होने से MSP अभियान प्रभावित हुआ है. हालांकि सरकार नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल लक्ष्य के मुकाबले खरीद काफी पीछे है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 16, 2026,
  • Updated Apr 16, 2026, 1:43 PM IST

सरकारी एजेंसियां 2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अप्रैल-जून) के लिए गेहूं खरीद अभियान चला रही हैं, लेकिन यह काम अब तक धीमा है, क्योंकि पंजाब और हरियाणा ने बेमौसम बारिश के कारण खरीद कम कर दी है.

अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद 15.30 लाख टन (MT) तक पहुंच गई है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में हुई है. यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 70% कम है. लगभग दो लाख किसानों से की गई यह खरीद, अब तक मुख्य उत्पादक राज्यों की मंडियों में आए 35 लाख टन गेहूं के मुकाबले है.

एक साल पहले, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित अलग-अलग राज्यों की मंडियों में 9 लाख टन से अधिक गेहूं आया था.

अधिकारी अनाज खरीद की धीमी गति का कारण देर से कटाई और कई राज्यों में हाल की बेमौसम बारिश को बता रहे हैं. दरअसल किसान बेमौसम बारिश के बाद अनाज की खरीद के नियमों में ढील की मांग कर रहे हैं, जिससे गेहूं बिक्री में अड़चनें आ रही हैं.

एक अधिकारी ने FE को बताया, "हालांकि खाद्य मंत्रालय ने पिछले महीने की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसल के लिए राजस्थान में अनाज खरीद के नियमों में ढील दी है, लेकिन पंजाब और हरियाणा से भी इसी तरह की रियायतों के लिए रिपोर्ट का इंतजार है."

मौसम का प्रभाव

नियमों में ढील के तहत, राजस्थान के लिए 50% तक चमक (luster) खो चुके गेहूं की खरीद और सिकुड़े या टूटे हुए दानों की सीमा को 6% से बढ़ाकर 15% करने की मंजूरी दी गई है. इससे किसानों को उनकी प्रभावित फसल के लिए MSP मिल सकेगा.

इस सीजन में पंजाब में खरीद काफी धीमी रही है. पंजाब केंद्रीय पूल में अनाज के स्टॉक में सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है, लेकिन अब तक यहां केवल 482 किसानों से 29,925 टन गेहूं की खरीद हुई है. पूरे राज्य की मंडियों में 1 लाख टन से अधिक अनाज आया है. पिछले 2025-26 मार्केटिंग सीजन में, कुल 30 MT से अधिक गेहूं की खरीद में से पंजाब ने केंद्रीय पूल में 12.2 MT का योगदान दिया था.

एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि खाद्य मंत्रालय पंजाब और हरियाणा को भी गेहूं खरीद में इसी तरह की ढील देने पर विचार कर रहा है, लेकिन फिलहाल केवल 'उचित और औसत गुणवत्ता' (Fair and Average Quality) वाले अनाज की ही खरीद की जा रही है. खरीद में सुस्ती का मुख्य कारण फसल की कटाई से ठीक पहले हुई बारिश के कारण दानों में नमी की मात्रा बढ़ जाने से कटाई में हुई देरी को माना जा रहा है. 

कैसी रहेगी आपूर्ति 

एजेंसियां ​​2026-27 के मार्केटिंग साल में, मुख्य गेहूं उत्पादक राज्यों – पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों से 30 MT से ज्यादा गेहूं खरीदने का लक्ष्य बना रही हैं. इसका मकसद स्टॉक को मजबूत करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आपूर्ति सुनिश्चित करना है.

अभी, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास केंद्रीय पूल स्टॉक के तौर पर 21.5 MT से ज्यादा गेहूं है, जबकि 1 अप्रैल के लिए बफर स्टॉक 7.46 MT तय है. कृषि मंत्रालय ने 2025-2026 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 120 MT गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है. व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह उत्पादन 2024-25 के फसल वर्ष के 117 MT उत्पादन से निश्चित रूप से ज्यादा है.

सरकार ने मौजूदा मार्केटिंग साल के लिए 2585 रुपये प्रति क्विंटल का MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) घोषित किया है.

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