
कर्नाटक के मंत्री सतीश जरकीहोली ने बताया कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग को लेकर कर्नाटक फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन और यूनियनों की मंगलवार को एक बैठक होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यह बैठक डिप्टी कमिश्नर (DC) के नेतृत्व में होगी. जरकीहोली ने कहा कि इस बैठक में संगठन के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और चर्चा के बाद ही आगे की स्थिति साफ हो पाएगी.
सोमवार को उन्होंने कहा, "DC के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक होगी. हमें कल तक इंतजार करना होगा कि इस चर्चा से क्या नतीजा निकलता है."
जरकीहोली ने आगे कहा कि मौजूदा स्थिति कब तक चलेगी, यह अभी तय नहीं है. यह मामला पूरी तरह से सरकार के हाथ में भी नहीं है, क्योंकि अभी फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन और यूनियनों के बीच बातचीत चल रही है.
उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि यह कब तक चलेगा. यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन और यूनियनों के बीच बातचीत जारी है."
उन्होंने आगे कहा, "अगर MSP नहीं बढ़ाया गया, तो लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा."
31 अक्टूबर को, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मांड्या जिले में पहुंचने की खबर आई, तो किसानों ने उनके खिलाफ काला झंडा दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन के बाद, कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
कर्नाटक में न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और कीमतों को लेकर चल रहा संकट मुख्य रूप से गन्ने और चीनी के दाम से जुड़ा है. इसमें किसान, चीनी मिल मालिक, कर्नाटक राज्य सरकार और केंद्र सरकार शामिल हैं.
शनिवार (24 अक्टूबर) को 'कर्नाटक रैथा संघ हसीरु सेना' के महासचिव प्रेम चौगुला ने किसान कार्यकर्ताओं की तीन मांगें रखीं. उन्होंने कहा, "इन मांगों में राज्य सरकार से 1,000 रुपये प्रति टन का समर्थन मूल्य, चीनी मिलों से 4,500 रुपये प्रति टन का दाम, और तौल के समय गंदगी या कचरे के नाम पर की जाने वाली कथित धांधली को रोकने के लिए कार्रवाई करना शामिल है."
इससे पहले 17 अक्टूबर को, कर्नाटक के गन्ना उत्पादक जिलों के किसानों ने अपने चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य और केंद्र सरकार के सामने तीन मांगें रखीं. बेलगावी के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद रोशन ने बताया कि दोनों सरकारों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे.
उन्होंने कहा, "पहली मांग यह है कि चीनी का MSP बढ़ाकर 60 रुपये किया जाए, हालांकि वे इस पर सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं. किसानों ने यह भी मांग की है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की ओर से कर्नाटक को 100 प्रतिशत इथेनॉल आवंटित किया जाए. रोशन ने बताया कि पिछले साल राज्य को केवल 30-40 प्रतिशत आवंटन ही मिला था, जिससे कई इथेनॉल और चीनी मिलें अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाईं. इससे कैश फ्लो की समस्या पैदा हुई, जिसका असर किसानों को भुगतान करने की उनकी क्षमता पर पड़ा."
उन्होंने आगे कहा कि अगर यह मांग पूरी हो जाती है, तो इससे मक्का उगाने वाले किसानों को भी फायदा होगा. तीसरी मांग घरेलू और कमर्शियल चीनी के लिए अलग-अलग कीमत तय करने की है, जिसमें कमर्शियल चीनी की कीमत अधिक रखी जाए ताकि चीनी मिलों और किसानों की कमाई बेहतर हो सके.(ANI)