
देश की बड़ी प्याज मंडियों में शुमार अलवर मंडी में लाल प्याज की नई फसल की आवक शुरू हो गई है. इस बार शुरुआती सीजन में किसानों को प्याज के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे उन्हें पिछले साल हुए नुकसान से उबरने की उम्मीद है. फिलहाल मंडी में रोजाना 10 हजार से 15 हजार कट्टे प्याज पहुंच रहे हैं. दिवाली के बाद आवक में तेजी आने की संभावना है और प्रतिदिन 80 हजार से एक लाख कट्टे तक प्याज मंडी पहुंच सकती है. हालांकि, हाल में हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. बारिश के कारण गीली हुई प्याज को किसान सुखाने में जुटे हैं.
अलवर के साथ भरतपुर, दौसा, सीकर और झुंझुनूं के आसपास के इलाकों में प्याज की बड़े पैमाने पर खेती होती है. अलवर की लाल प्याज अपनी गुणवत्ता और पहचान के लिए देशभर में मशहूर है. नासिक के बाद अलवर को देश की दूसरी सबसे बड़ी प्याज मंडी माना जाता है. यहां नवंबर से फरवरी तक प्याज की आवक बनी रहती है. अलवर मंडी से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में प्याज की सप्लाई होती है.
पिछले साल प्याज की कीमतें अच्छी नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. कई किसानों को अपनी फसल की लागत तक नहीं मिल पाई थी और उन पर कर्ज का बोझ बढ़ गया था. हालांकि, इस बार शुरुआती आवक के साथ ही किसानों को बेहतर कीमतें मिल रही हैं. फिलहाल मंडी में प्याज का थोक भाव 35 से 40 रुपये प्रति किलो के आसपास है. वहीं, 40 किलो प्याज का भाव 1,300 से 1,400 रुपये तक चल रहा है. कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.
हाल के दिनों में हुई बारिश के कारण खेतों और तैयार फसल पर असर पड़ा है. बारिश से प्याज गीली होने के चलते मंडी में इसकी आवक भी प्रभावित हुई है. किसान प्याज को सुखाने में लगे हैं, ताकि उसे बेहतर गुणवत्ता के साथ मंडी में बिक्री के लिए लाया जा सके. दिवाली के बाद आवक बढ़ने की उम्मीद है. उस समय मंडी में रोजाना 80 हजार से एक लाख कट्टे तक प्याज पहुंचने का अनुमान है.
अलवर मंडी के अलावा खैरथल, बहरोड़ और खेड़ली मंडियों समेत आसपास की अन्य मंडियों में भी किसान प्याज बेचने पहुंचते हैं. अलवर में देश के अलग-अलग राज्यों से करीब 300 व्यापारी प्याज की खरीदारी करने आते हैं. ये व्यापारी यहां से प्याज खरीदकर देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी सप्लाई करते हैं. पिछले साल नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में भी अलवर की प्याज भेजी गई थी.
अलवर से देश के अलग-अलग राज्यों तक प्याज की समय पर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रेलवे की ओर से प्याज स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाती है. इससे व्यापारियों को बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई करने में मदद मिलती है. देश के विभिन्न हिस्सों में मांग के अनुसार प्याज पहुंचाने में रेलवे की यह व्यवस्था अहम भूमिका निभाती है.
अलवर और आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था में प्याज की खेती और कारोबार की अहम भूमिका है. प्याज की फसल बिकने के बाद किसानों के हाथ में पैसा आता है, जिसका असर स्थानीय बाजार और दूसरे कारोबारों पर भी पड़ता है. किसान और व्यापारी बाजार में खर्च करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलता है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से लाखों लोग जुड़े हुए हैं.
व्यापारी सौरभ कालरा और पप्पू सैनी ने कहा कि इस बार प्याज की आवक शुरू हो चुकी है और किसानों को बेहतर भाव मिल रहे हैं. दिवाली के बाद मंडी में आवक बढ़ने की उम्मीद है. इससे कारोबार में तेजी आने की संभावना है.