LPG Crisis: होटलों में घटी मांग से प्याज बाजार धड़ाम, किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल

LPG Crisis: होटलों में घटी मांग से प्याज बाजार धड़ाम, किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल

ईरान–इजराइल संघर्ष का असर भारत के प्याज बाजार पर साफ दिख रहा है. LPG सप्लाई बाधित होने से होटल और रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, जिसके कारण प्याज की खपत तेजी से घटी है. इस वजह से कर्नाटक में प्याज के दाम गिरकर 6–12 रुपये प्रति किलो रह गए हैं और किसान लागत मूल्य भी नहीं निकाल पा रहे. बढ़ी सप्लाई, महंगी बोरियां और नासिक की तुलना में कम कीमत मिलने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. किसान सरकार से MSP और तत्काल खरीद जैसे राहत उपायों की मांग कर रहे हैं.

onion priceonion price
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 19, 2026,
  • Updated Mar 19, 2026, 2:25 PM IST

ईरान-इजराइल लड़ाई का असर अब भारत की मंडियों में भी दिखाई देने लगा है. कर्नाटक में प्याज के दाम भारी गिरावट के साथ 6 से 12 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं, जिससे किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है. प्याज के निर्यात में आई कमी और घरेलू खपत घटने से बाजार में मांग कमजोर पड़ी है. होटलों के बंद होने से प्याज की मांग गिर गई है जिसका असर भाव पर साफ दिखाई दे रहा है.

कर्नाटक प्याज उत्पादन का बड़ा केंद्र है, लेकिन इस समय कई जिलों में किसानों को अपनी उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा. स्थानीय बाजारों में अच्छी क्वालिटी का प्याज 10–12 रुपये प्रति किलो और छोटी या कम क्वालिटी की उपज 6–8 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है. किसानों का कहना है कि इन दरों पर वे हार्वेस्टिंग, पैकिंग और परिवहन का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे.

एलपीजी संकट से प्याज की मांग घटी

व्यापारियों का मानना है कि ईरान–इजराइल युद्ध के चलते LPG सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर असर पड़ा है. LPG की कमी और ब्लैक मार्केट में ऊंची कीमतों के कारण कई होटल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जिससे प्याज की खपत तेजी से कम हुई है. इसका सीधा प्रभाव प्याज की बिक्री और कीमतों पर पड़ा है.

इसके साथ ही प्याज रखने के लिए उपयोग होने वाली गनी बैग (बोरी) के दाम भी बढ़कर 18–20 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गए हैं. मंडियों में किसान बताते हैं कि कम भावों के कारण वे न प्याज बेच पा रहे हैं और न ही महंगी बोरियां खरीद पा रहे हैं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़े पैमाने पर प्याज की आवक होने से बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है. 

नासिक की तुलना में आधी कीमत

कोप्पल, बल्लारी, विजयपुरा और होसपेटे जिलों में भी किसानों की स्थिति इसी तरह है. स्थानीय किसानों ने नासिक की उपज की तुलना में अपने प्याज के कम दाम मिलने पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि नासिक की तुलना में उन्हें लगभग आधी कीमत मिलती है.

स्थिति में सुधार के कोई संकेत न देखते हुए किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सरकारी खरीद जैसे तत्काल कदम उठाने की मांग की है, ताकि उन्हें भारी नुकसान से बचाया जा सके.

ईरान-इजराइल युद्ध का असर महाराष्ट्र की नासिक मंडी में भी देखा जा रहा है. यहां का प्याज खाड़ी और मध्य पूर्व के कई देशों में निर्यात होता है. दुबई सबसे बड़ा मार्केट है जहां से अलग-अलग देशों को प्याज की सप्लाई की जाती है.

जब से लड़ाई शुरू हुई है तब से दुबई जाने वाले कई कंटेनर फंस गए हैं. यहां तक कि कई कंटेनर को बीच रास्ते से लौटना पड़ा है. प्याज के कई ऑर्डर कैंसिल हो गए हैं. इससे व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. लड़ाई रुकने तक इसमें किसी तरह के सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है.

MORE NEWS

Read more!