World Environment Day 2026: खेती का यह तरीका बचाएगा पर्यावरण! क्या इसके बारे में जानते हैं आप?

World Environment Day 2026: खेती का यह तरीका बचाएगा पर्यावरण! क्या इसके बारे में जानते हैं आप?

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है. ऐसे में गांव की हरियाली पूरी तरह किसानों पर निर्भर है, इसलिए पर्यावरण की बेहतरी और मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के लिए किसानों को खेती में ये तरीका अपनाना चाहिए. ये तरीका पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो सकता है.

विश्व पर्यावरण दिवस (AI- तस्वीर)विश्व पर्यावरण दिवस (AI- तस्वीर)
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Jun 05, 2026,
  • Updated Jun 05, 2026, 10:23 AM IST

आज यानी 5 जून को दुनिया भर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है. पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत जरूरी है कि हर व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में अपनी अहम भूमिका निभाए. ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं, पॉल्युशन कम करें, यही पर्यावरण संरक्षण के कुछ तरीके हैं. अब अगर आप ये सोच रहे हैं कि एक किसान तो खेती करता ही है वह पर्यावरण संरक्षण में कैसे अपना रोल अदा कर सकता है. तो इसका भी तरीका है. यह तरीका है जैविक और प्राकृतिक खेती. इस खेती को करके किसान भी पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे.

पर्यावरण के लिए प्राकृतिक खेती का महत्व

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्राकृतिक खेती की चर्चा बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि यह न केवल खेती का तरीका है बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मजबूत माध्यम भी है. इसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जगह प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी, पानी और हवा पर पड़ने वाला नुकसान काफी कम हो जाता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उसमें मौजूद सूक्ष्मजीव सुरक्षित रहते हैं. प्राकृतिक खेती पानी बचाने में भी मदद करती है. इसी कारण प्राकृतिक खेती को आज टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

जैविक खेती है पर्यावरण के लिए वरदान

देश के अन्नदाताओं को खेत-खलिहानों को स्वस्थ रखने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के लिए जैविक खेती की सलाह दी जाती है. वहीं, देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी लगातार प्रयासरत है. जैविक खेती के तहत मिट्टी को पोषण देने के लिए जैविक तरीके से बनी खाद का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें खेतों में बचा हुआ पौधे का कचरा सहित पशुओं का गोबर और गौमूत्र से बनी जैविक खाद, केंचुआ कंपोस्ट खाद आदि शामिल होता है. इससे पर्यावरण को तो फायदा पहुंचता ही है, वहीं खेत की मिट्टी की सेहत में भी काफी सुधार होता है.

जैविक और प्राकृतिक खेती के फायदे

जैविक और प्राकृतिक खेती करने के कई फायदे हैं. इस खेती से जहां किसानों की उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. वहीं इसकी खेती करने वाले किसानों को कम लागत में अच्छा मुनाफा भी होता है. इसकी खेती में जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग का  होने से यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. वहीं, यह पर्यावरण के लिए भी काफी बेहतर होता है. जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए पानी का भी कम इस्तेमाल किया जाता है.

क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति दुनिया भर में जागरूकता फैलाना और लोगों को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करना है.  इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा वर्ष 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन में की गई थी. पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 को मनाया गया था. इसका मकसद जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, और वनों की कटाई जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है.  

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की क्या है थीम

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम 'जलवायु कार्रवाई' (Climate Action) या #NowForClimate है. इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तुरंत कदम उठाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण की रक्षा पर जोर देना है. बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का पिघलना और बदलता मौसम हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अब समय कार्रवाई का है. यह थीम स्वच्छ ऊर्जा, हरित जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, ताकि भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके.

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