
पश्चिम एशिया में व्यापार सामान्य होने की उम्मीद के बीच भारतीय बासमती कारोबार को अब पाकिस्तान की नई निर्यात नीति से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल, पाकिस्तान सरकार बासमती निर्यातकों को दी जा रही ड्यूटी ड्रॉबैक राहत को जून के बाद भी जारी रखने पर विचार कर रही है. भारतीय निर्यातकों का मानना है कि इससे पाकिस्तान कम कीमत पर ज्यादा आक्रामक तरीके से सौदे कर सकता है और इसका असर भारतीय बासमती के अंतरराष्ट्रीय दाम पर पड़ सकता है.
पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने 23 जनवरी को आदेश जारी कर चावल क्षेत्र के लिए स्थानीय कर और लेवी वापसी योजना लागू की थी. इसके तहत बासमती निर्यातकों को निर्यात मूल्य के आधार पर प्रोत्साहन दिया गया. आदेश के मुताबिक, अगर बासमती चावल 750 डॉलर प्रति टन या उससे अधिक कीमत पर निर्यात किया जाता है तो निर्यातक को एफओबी मूल्य का 9 प्रतिशत तक लाभ मिलता है. वहीं, 750 डॉलर प्रति टन से कम कीमत पर निर्यात होने पर 3 प्रतिशत तक लाभ दिया जाता है. यह व्यवस्था फिलहाल 30 जून तक लागू है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय व्यापार सूत्रों और बासमती कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पाकिस्तान का कुल निर्यात भारत की तुलना में काफी छोटा है, लेकिन उसकी कम कीमतें अंतरराष्ट्रीय बातचीत में असर डालती हैं. एक प्रमुख भारतीय बासमती निर्यातक ने कहा कि जब पाकिस्तान 750 डॉलर प्रति टन जैसे स्तर पर प्रोत्साहन देता है तो वैश्विक खरीदार उसी को आधार बनाकर भारतीय निर्यातकों से भी कम दर मांगने लगते हैं. अगर इस योजना को अगले छह महीने और बढ़ाया गया तो इसका फायदा बासमती ब्रांड को नहीं, बल्कि कम कीमत वाली प्रतिस्पर्धा को मिलेगा.
पाकिस्तान के राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (REAP) के चेयरमैन फैसल जहांगीर ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि ड्यूटी ड्रॉबैक ऑन लोकल टैक्सेज एंड लेवीज (DLTL) योजना से निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी कीमत बनाए रखने में मदद मिलेगी. इससे पाकिस्तान वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले बेहतर स्थिति में आ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय चावल अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होने से पाकिस्तानी निर्यातकों के लिए बाजार में हिस्सेदारी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था.
व्यापार सूत्रों के अनुसार, भारतीय बासमती को अप्रैल 2026 में औसतन 920 डॉलर प्रति टन का निर्यात मूल्य मिला. यह पाकिस्तान की उस सीमा से काफी ऊपर है जिस पर वहां 9 प्रतिशत तक लाभ दिया जा रहा है. एपीडा के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत ने 4.74 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 436.01 मिलियन डॉलर रही. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का बासमती निर्यात 65.2 लाख टन तक पहुंच गया जबकि इसका कुल मूल्य 5.67 अरब डॉलर रहा.
व्यापार सूत्रों के अनुसार, भारत में निर्यात अनुबंध से जुड़ी कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं लागू हैं, जबकि पाकिस्तान में पहले से निर्यात अनुबंध पंजीकरण जैसी व्यवस्था नहीं है और उस पर अलग शुल्क भी नहीं लिया जाता. कारोबार से जुड़े लोग मानते हैं कि इससे वहां निर्यात प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज रहती है.
पाकिस्तान ने 2025-26 में करीब 10 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया. जनवरी से मार्च के दौरान निर्यात में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन ड्यूटी लाभ मिलने के बाद अप्रैल और मई में निर्यात में सुधार दर्ज किया गया. वैश्विक बासमती व्यापार में पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी करीब 62 प्रतिशत मानी जाती है.
भारतीय व्यापार सूत्रों का कहना है कि क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद पाकिस्तान के निर्यात पर बड़ा असर नहीं पड़ा. मार्च से मई 2026 के दौरान उसने 2024-25 के पूरे जुलाई-जून निर्यात का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा भेज दिया. पाकिस्तान ने समुद्री मार्ग के साथ ईरान के जरिए मध्य एशिया तक पहुंचने वाले जमीनी रास्तों का भी इस्तेमाल किया, जिससे आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली.