Digital Farming: मोबाइल संभालेगा खेत, बढ़ेगी पैदावार; डिजिटल कृषि मिशन 2.0 से साकार होगा विकसित भारत का सपना

Digital Farming: मोबाइल संभालेगा खेत, बढ़ेगी पैदावार; डिजिटल कृषि मिशन 2.0 से साकार होगा विकसित भारत का सपना

डिजिटल कृषि मिशन 2.0 भारत की खेती में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है, जहां अब हल के साथ-साथ मोबाइल और तकनीक खेतों की कमान संभालेंगे. नीति आयोग के अनुसार, इस मिशन का असली मकसद किसानों को 'स्मार्ट' बनाना है ताकि वे सटीक जानकारी के साथ बेहतर पैदावार ले सकें. जब तकनीक और मिट्टी का मेल होगा, तो खेती में लागत कम होगी और किसान की कमाई और समृद्धि बढ़ेगी. यह बदलाव न केवल किसानों की जिंदगी को आसान बनाएगा, बल्कि उनके बढ़ते कदमों से भारत दुनिया की एक बड़ी कृषि महाशक्ति बनकर उभरेगा.

Digital Krishi Mission 2.0Digital Krishi Mission 2.0
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jan 05, 2026,
  • Updated Jan 05, 2026, 6:02 PM IST

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए खेती को मजबूत करना सबसे पहली शर्त है. देश की 46% आबादी आज भी खेती पर निर्भर है, इसलिए विकसित भारत का रास्ता किसानों की समृद्धि से होकर गुजरता है. भारत के 86% किसान छोटे हैं जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है, जिससे बड़ी मशीनों का उपयोग महंगा और कठिन हो जाता है. नीति आयोग का कहना है कि इस चुनौती को बदलने के लिए 'फ्रंटियर टेक्नोलॉजी' यानी आधुनिक तकनीक की जरूरत है. ये तकनीकें कम लागत, कम पानी और कम खाद में भी बंपर पैदावार देने की ताकत रखती हैं. आज दुनिया भर में ऐसी तकनीकें फसल की बर्बादी रोककर उसकी गुणवत्ता बढ़ा रही हैं. भारत के लिए अब इन आधुनिक तकनीकों को अपनाना सिर्फ पसंद नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग है.

डिजिटल मिशन से स्मार्ट बनेगा किसान

नीति आयोग का मानना है कि 'डिजिटल कृषि मिशन 2.0' खेती में क्रांति लाएगा. यह मिशन तीन स्तंभों पर टिका है: बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना, नई खोजों यानि इन्नोवेशन को बढ़ावा देना और सरकारी व निजी संस्थाओं को एक साथ लाना. इसका मकसद तकनीक को फाइलों से निकालकर खेत की आखिरी मेड़ तक पहुंचाना है ताकि किसान का मुनाफा बढ़ सके. इसके तहत 'कृषि कोष' नाम का डिजिटल भंडार बनाया जा रहा है, जहां सरकार और कंपनियां डेटा साझा करेंगी. इससे किसान को अपनी मिट्टी और मौसम के हिसाब से बिल्कुल सटीक सलाह मिलेगी. जब डेटा एक जगह होगा, तो बैंकों से लोन मिलना और बीमा कंपनियों से मुआवजे का निपटारा होना बहुत आसान और पारदर्शी हो जाएगा.

मोबाइल और तकनीक संभालेंगे खेत

नीति आयोग के अनुसार भारत में एक कृषि सलाहकार पर 1100 किसानों की जिम्मेदारी है, जिससे हर किसान तक पहुंचना मुश्किल है. इस कमी को दूर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा है. अब ऐसे 'एआई  चैटबॉट' और 'किसान कॉल सेंटर' बन रहे हैं जो स्थानीय भाषाओं में बात करेंगे. किसान अपने मोबाइल से फसल की फोटो भेजकर बीमारी का तुरंत पता लगा सकेंगे. साथ ही, 'ड्रोन दीदी' जैसे कार्यक्रमों से गांव की महिलाओं और युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. ये प्रशिक्षित युवा किसान और आधुनिक मशीनों के बीच एक पुल का काम करेंगे. जब सलाह आपके अपने खेत की स्थिति के हिसाब से 'हाइपरलोकल' होगी, तभी किसानों का तकनीक पर भरोसा बढ़ेगा और खेती एक फायदे का सौदा बनेगी.

 स्टार्टअप्स और एग्रीटेक से शुरू होगा नया युग

नीति आयोग के अनुसार आज भारत में 1900 से ज्यादा एग्रीटेक स्टार्टअप्स ड्रोन, सेंसर और मोबाइल ऐप के जरिए खेती को आसान बना रहे हैं. इन कंपनियों को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए सरकार 'एक्सेलेरेटर' सिस्टम मजबूत कर रही है, जो इन्हें जरूरी डेटा और बाजार तक पहुंचाएगा. चूंकि खेती में नई खोजों का असर दिखने में समय लगता है, इसलिए सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर 'पेशेंट कैपिटल' (लंबे समय का निवेश) के लिए साझा फंड बनाएंगे. इस मदद से ऐसी छोटी और सस्ती मशीनें बनाई जाएंगी जिन्हें छोटा किसान भी आसानी से किराए पर ले सके या खरीद सके. इससे न केवल खेती का आधुनिकीकरण होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी.

अब हर खेत बनेगा खुशहाली का द्वार

साल 1960 की हरित क्रांति सरकारी शोध पर आधारित थी, लेकिन अब सरकारी और निजी क्षेत्र को साथ मिलकर काम करना होगा. हमें ऐसे शोध की जरूरत है जो लैब से निकलकर सीधे खेत तक पहुंचे. भविष्य की खेती के लिए सिर्फ हल चलाने वाले हाथ नहीं, बल्कि ड्रोन पायलट, डेटा साइंटिस्ट और एग्री-बिजनेस एक्सपर्ट्स की जरूरत है. इसी विजन के साथ स्कूलों और कॉलेजों के कोर्स बदले जा रहे हैं ताकि छात्र शुरुआत से ही आधुनिक खेती सीख सकें. सरकार 'नेशनल एग्री-टैलेंट फ्रेमवर्क' बना रही है, जो युवाओं को नई नौकरियों के लिए तैयार करेगा. साथ ही, देशभर में 'उत्कृष्टता केंद्र' खोले जा रहे हैं, जहां वैज्ञानिक और बड़ी कंपनियां मिलकर सूखा झेलने वाले बीज और कम पानी वाली सिंचाई तकनीक विकसित करेंगे.

तकनीक वाली खेती, तरक्की वाला किसान

जेनेटिक इंजीनियरिंग या AI जैसी तकनीकों के साथ कुछ जोखिम भी होते हैं. इन्हें सुरक्षित बनाने के लिए सरकार 'पॉलिसी फोरसाइट यूनिट' बना रही है, जो भविष्य की चुनौतियों को पहले ही भांप लेगी. साथ ही 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' जैसी व्यवस्था की जा रही है, जहां नई तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सुरक्षित दायरे में परखा जा सके. इससे यह पक्का होगा कि तकनीक किसानों तक पहुंचने से पहले पूरी तरह भरोसेमंद है. इस तरह एक पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था तैयार होगी जो भारतीय कृषि को दुनिया के मंच पर सबसे आगे खड़ा करेगी. 2047 तक भारत तभी विकसित बनेगा, जब हमारा किसान तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से समृद्ध होगा. यह डिजिटल क्रांति उसी खुशहाली की पहली सीढ़ी है.

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