
देश में चाय उत्पादन में गिरावट का दौर जारी है. इस साल मार्च के दौरान कुल उत्पादन घटकर 66.86 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 67.85 मिलियन किलोग्राम था. इस तरह सालाना आधार पर करीब 1.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. हाल के महीनों में मौसम से जुड़ी चुनौतियों का असर लगातार उत्पादन पर दिखाई दे रहा है. उत्पादन में कमी का मुख्य कारण उत्तर भारत रहा, जहां अभी तक उत्पादन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है. मार्च में उत्तर भारत का उत्पादन 5.8 फीसदी घटकर 49.05 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल 52.08 मिलियन किलोग्राम था. जलवायु और मौसमी अस्थिरता ने यहां उत्पादन को प्रभावित किया है.
उत्तर भारत में सबसे ज्यादा असर असम पर पड़ा है. यहां चाय उत्पादन में करीब 39 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और कुल उत्पादन 17.38 मिलियन किलोग्राम पर आ गया. असम घाटी क्षेत्र में उत्पादन घटकर 16.77 मिलियन किलोग्राम रह गया, जबकि कछार क्षेत्र में भी हल्की कमी के साथ उत्पादन 0.61 मिलियन किलोग्राम रहा. इस गिरावट ने कुल आंकड़ों को काफी प्रभावित किया है.
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल से सकारात्मक संकेत मिले हैं. मार्च में यहां उत्पादन 37 फीसदी बढ़कर 29.96 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया. डुआर्स, तराई और दार्जिलिंग तीनों प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है. डुआर्स में उत्पादन 16.35 मिलियन किलोग्राम, तराई में 13.44 मिलियन किलोग्राम और दार्जिलिंग में 0.17 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया. इस बढ़ोतरी ने आंशिक रूप से गिरावट की भरपाई की है.
दक्षिण भारत में चाय उत्पादन में अच्छी बढ़त देखने को मिली है. मार्च में यहां उत्पादन करीब 13 फीसदी बढ़कर 17.81 मिलियन किलोग्राम हो गया. तमिलनाडु और केरल में उत्पादन बढ़ा है. तमिलनाडु में उत्पादन 12.85 मिलियन किलोग्राम और केरल में 4.59 मिलियन किलोग्राम रहा. हालांकि, कर्नाटक में हल्की गिरावट दर्ज की गई.
देशभर में छोटे चाय उत्पादकों का योगदान थोड़ा बढ़कर 40.79 मिलियन किलोग्राम हो गया, जबकि बड़े उत्पादकों की हिस्सेदारी घटकर 20.07 मिलियन किलोग्राम रह गई. इससे उत्पादन संरचना में बदलाव का संकेत मिलता है.
चाय की अलग-अलग श्रेणियों में सीटीसी चाय का दबदबा कायम रहा, जिसका उत्पादन 60.33 मिलियन किलोग्राम रहा. वहीं ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन 5.59 मिलियन किलोग्राम और ग्रीन टी का उत्पादन 0.94 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया.