
गन्ना किसानों की शिकायतों और मांगों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार एक हफ्ते के अंदर हाईलेवल जॉइंट कमेटी गठित करेगी. सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी की महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. इसमें किसानों ने बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला देते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग की.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, समिति में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकारों, किसान संगठनों और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ विषय विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा. समिति गन्ने की कटाई के समय, चीनी की रिकवरी के वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक प्रयोगशाला जांच प्रणालियों और तौल की सटीकता जैसे तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करेगी. इसके बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी.
बैठक में किसानों ने चीनी मिलों की ओर से दर्ज की जाने वाली रिकवरी के आंकड़ों में विसंगतियों, गन्ने की तौल, वजन में कटौती, बर्बादी, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े मुद्दे उठाए. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अन्न उपलब्ध कराने वाले किसानों का शोषण किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने रिकवरी दर में विसंगतियों, वजन में कटौती और वास्तविक रिकवरी के आंकड़े छिपाने से जुड़े मामलों को बेहद संवेदनशील बताया.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल तत्काल या अलग-अलग समस्याओं का समाधान करने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था बनाना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी चीनी मिल किसानों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार किसानों के सुझावों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ और बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करेगी. बैठक में अल्पकालिक और दीर्घकालिक नीतिगत फैसले लेने के साथ प्रशासनिक सुधारों और नीतिगत और तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने पर भी सहमति बनी.
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन की पद्धति के बारे में जानकारी दी. केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक चलने वाले चीनी सीजन के लिए गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. यह दर 10.25 फीसदी की बुनियादी चीनी रिकवरी पर लागू है. FRP वह कानूनी रूप से अनिवार्य न्यूनतम मूल्य है, जिसका भुगतान चीनी मिलों को किसानों को करना होता है.
कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन के हावेरी जिला अध्यक्ष भुवनेश सिद्दापुर ने बैठक के बाद पीटीआई से कहा कि समिति गठित करने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है. किसानों को तत्काल समाधान के तौर पर गन्ने के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसान संगठन के अन्य सदस्यों के साथ चर्चा करने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी. एसोसिएशन ने बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य कम से कम 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है.
किसान संगठनों ने मांग की कि गन्ने का FRP केवल चीनी की कीमतों के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए. इसमें एथेनॉल, खोई (बैगास) और बिजली जैसे सह-उत्पादों से होने वाली आय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसके अलावा, कर्नाटक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार की तर्ज पर FRP से अधिक राज्य परामर्श मूल्य (SAP) देने की मांग भी उठाई गई. किसानों ने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है.
कर्नाटक के किसानों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग को लेकर 29 सितंबर को हुबली में आंदोलन शुरू किया था. किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हाईवे जाम करने की चेतावनी दी थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की और उन्हें बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया था. बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य है. (पीटीआई)