GM बासमती चावल की खेती को 'मंजूरी' पर SC में उठे सवाल, प्रशांत भूषण ने की जल्द सुनवाई की मांग

GM बासमती चावल की खेती को 'मंजूरी' पर SC में उठे सवाल, प्रशांत भूषण ने की जल्द सुनवाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट में GM बासमती चावल की खेती को मंजूरी दिए जाने के आरोपों पर लंबित अवमानना याचिकाओं की जल्द सुनवाई की मांग की गई है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इससे पारंपरिक बासमती चावल की शुद्धता प्रभावित होने का खतरा है.

Supreme Court GM Rice Case Listing IssueSupreme Court GM Rice Case Listing Issue
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 2:06 PM IST

GM बासमती चावल की खेती को ‘मंजूरी’ दिए जाने के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मुद्दे पर लंबित अवमानना याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की गई. वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ से कहा कि शाकनाशी-सहिष्णु GM बासमती चावल को मंजूरी दिए जाने के बाद मामले को जल्द सुना जाना चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि इससे पारंपरिक बासमती चावल की शुद्धता प्रभावित हो सकती है.

'GM बासमती से पारंपरिक चावल को खतरा'

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने प्रशांत भूषण ने कहा कि अवमानना याचिकाओं का GM सरसों मामले की सुनवाई से जुड़े संदर्भ से कोई संबंध नहीं है. इसलिए इन्हें नियमित अवमानना पीठ के सामने लिस्‍ट किया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में दायर याचिका का पहले जिक्र किए जाने के बावजूद अब तक सुनवाई नहीं हुई है.

केंद्र पर SC के आदेश की अनदेखी का आरोप

यह अवमानना याचिका कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स ने अपनी जनहित याचिका के तहत 2025 में दायर की थी. इसमें केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों पर GM और जीन-संपादित फसलों को जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के फैसले का हवाला दिया गया है. इसमें केंद्र सरकार को विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद GM फसलों पर व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया गया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस प्रक्रिया को पूरा किए बिना ही संबंधित फसलों को जारी किया गया.

RobiNOweed और दो जीन-संपादित किस्मों का भी जिक्र

याचिका के मुताबिक, शाकनाशी-सहिष्णु GM बासमती चावल की किस्मों को मई 2024 में 'RobiNOweed' ब्रांड नाम से व्यावसायिक रूप से जारी किया गया था. इसके अलावा, मई 2025 में DRR Rice 100, जिसे 'Kamla' नाम से ब्रांड किया गया है और Pusa DST Rice 1 जैसी जीन-संपादित चावल की किस्मों को जारी किए जाने का भी दावा किया गया है.

याचिकाकर्ता का कहना है कि इन किस्मों को जारी करना सरकार की ओर से अदालत को पहले दिए गए उस आश्वासन के उलट है, जिसके अनुसार व्यापक राष्ट्रीय नीति बनने से पहले GM फसलों को पर्यावरण में जारी नहीं किया जाएगा.

GM सरसों मामले से अलग है अवमानना याचिका

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले में एक मुद्दे पर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ के बीच मतभेद था. इस मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेजा गया था और इसका संबंध GM सरसों से जुड़े मामले से है.

प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि अवमानना याचिकाएं उस संदर्भ से अलग हैं और उन पर अलग से सुनवाई की जा सकती है. अब इन याचिकाओं को कब सूचीबद्ध किया जाएगा, इस पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है. (पीटीआई)

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