मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित किसानों को मिलेगी राहत, केंद्रीय टीम ने नुकसान का किया आकलन

मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित किसानों को मिलेगी राहत, केंद्रीय टीम ने नुकसान का किया आकलन

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की कमी से सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरे की फसलें प्रभावित हुई हैं. फसल नुकसान और चारे-पानी के संकट से परेशान किसानों ने प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है.  वहीं, केंद्रीय टीम ने खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया है.

केंद्रीय टीम ने नुकसान का किया आकलनकेंद्रीय टीम ने नुकसान का किया आकलन
इशरार च‍िश्ती
  • Sambhaji Nagar,
  • Oct 10, 2026,
  • Updated Oct 10, 2026, 12:34 PM IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बन गए हैं. इसका असर सोयाबीन, मक्का, ज्वार और बाजरे की फसलों पर पड़ा है. फसलें प्रभावित होने से किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. वहीं, पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट भी गहराने लगा है. हालात का जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम मराठवाड़ा पहुंची. टीम ने खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखी और किसानों से बातचीत कर नुकसान की जानकारी ली. इस दौरान किसानों ने प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की.

सोयाबीन की खेती में लागत निकालना मुश्किल

केंद्रीय टीम के दौरे के दौरान छत्रपति संभाजीनगर जिले के वायगांव देमने गांव के किसान शहनाज देवरा सिंदे ने अपनी परेशानी बताई. उन्होंने कहा कि वे हर साल सोयाबीन की खेती करते हैं और सामान्य तौर पर अच्छी पैदावार होती है, लेकिन इस साल बारिश की कमी के कारण फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है. किसान के मुताबिक, सोयाबीन की बुवाई और खेती पर प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए हैं. इसके बावजूद फसल खराब होने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने केंद्रीय टीम से मांग की कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए.

सस्ते दाम पर मवेशी बेचने को मजबूर किसान

सूखे का असर सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है. मक्का, ज्वार और बाजरे की फसलें प्रभावित होने से पशुओं के लिए चारे की कमी भी होने लगी है. किसानों का कहना है कि पानी और चारे की कमी के कारण पशुपालन करना मुश्किल हो रहा है. किसान शहनाज देवरा सिंदे के अनुसार, कुछ किसान एक से दो लाख रुपये कीमत वाले मवेशियों को महज 10 से 20 हजार रुपये में बेचने के लिए मजबूर हैं. इससे किसानों को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले साल भी किसानों को अधिक सहायता देने का आश्वासन मिला था, लेकिन उन्हें करीब 7 हजार से 8,500 रुपये तक ही मदद मिली, इसलिए इस बार किसान चाहते हैं कि मुआवजा वास्तविक नुकसान के हिसाब से दिया जाए.

केंद्रीय टीम ने खेतों में जाकर देखा फसलों का नुकसान

केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी टीम ने वायगांव देमने गांव पहुंचकर फसलों की स्थिति का निरीक्षण किया. टीम ने किसानों से बातचीत करके बारिश की कमी, फसल खराब होने और खेती पर हुए खर्च की जानकारी जुटाई. इससे पहले अधिकारियों के साथ बैठक करके क्षेत्र में सूखे जैसे हालात और किसानों की समस्याओं की समीक्षा भी की गई. महाराष्ट्र सरकार के सचिव ने बताया कि केंद्रीय टीम मराठवाड़ा के हालात का जायजा लेने आई है. निरीक्षण के बाद टीम अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.

पेयजल और पशुओं के चारे का संकट बढ़ने की आशंका

छत्रपति संभाजीनगर के जिला कलेक्टर विनय गौड़ा जी.सी. ने बताया कि केंद्रीय टीम पूरे मराठवाड़ा संभाग में जमीन पर जाकर नुकसान का आकलन कर रही है. बारिश की कमी से फसलें प्रभावित हुई हैं. आने वाले दिनों में गांवों में पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी और चारे की समस्या बढ़ने की आशंका भी है. प्रशासन जिला और राज्य स्तर पर इन परिस्थितियों पर नजर रख रहा है. जल संरक्षण और ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए वीबी-जी राम जी सहित अन्य योजनाओं के तहत काम कराने की तैयारी की जा रही है. इससे पानी बचाने के साथ ग्रामीणों को रोजगार देने में भी मदद मिल सकती है.

फसल बीमा और मुआवजे की शिकायतों पर भी नजर

किसानों ने पिछले साल फसल नुकसान के मुआवजे और फसल बीमा के दावों का भुगतान नहीं होने की शिकायतें भी उठाई हैं. इस पर जिला कलेक्टर ने कहा कि ऐसी शिकायतों का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस बार फसल नुकसान का आकलन और पंचनामा सावधानी से पूरा करने की योजना है, ताकि कोई पात्र किसान छूट न जाए और फसल बीमा के दावे सही तरीके से दाखिल हो सकें. फिलहाल मराठवाड़ा के किसान बारिश की कमी से हुए नुकसान के बीच आर्थिक सहायता की उम्मीद कर रहे हैं. अब केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं. 

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