
केंद्र सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग वर्ष के लिए चीनी निर्यात को लेकर एक और अहम फैसला लिया है. खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों की मांग के आधार पर 87,587 टन का अतिरिक्त निर्यात कोटा मंजूर कर दिया है. इससे पहले सरकार इस सीजन के लिए 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दे चुकी थी, जिसके बाद फरवरी में 5 लाख टन का अतिरिक्त कोटा भी जारी किया गया था. मंत्रालय के अनुसार, फरवरी तक मिलों को अतिरिक्त कोटा के लिए आवेदन करना था. हालांकि, 5 लाख टन के अतिरिक्त कोटे में से केवल 87,587 टन के लिए ही आवेदन आए, जिसे मंजूरी दी गई. वहीं, बाकी कोटा अपने आप खत्म हो गया.
सरकार ने निर्यात के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है. मिलों को आवंटित चीनी का निर्यात 30 जून 2026 तक करना होगा. अगर कोई मिल इस तारीख तक कम से कम 70 प्रतिशत कोटा निर्यात कर देती है तो उसे बची हुई मात्रा 30 सितंबर 2026 तक भेजने की अनुमति मिलेगी.
अगर कोई मिल 70 प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती है तो उसका बचा हुआ कोटा खत्म माना जाएगा और इसे अन्य बेहतर प्रदर्शन करने वाली मिलों को दिया जा सकता है. साथ ही, भविष्य के कोटे में भी कमी की जाएगी.
सरकार ने बयान में कहा कि निर्यात कोटे का आपस में आदान-प्रदान नहीं किया जा सकेगा. जिन मिलों ने पहले स्टॉक लिमिट के नियमों का उल्लंघन किया है, उन्हें इस बार कोटा नहीं मिलेगा. नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और विदेशी व्यापार अधिनियम 1992 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
रिफाइनरी मिलों द्वारा कच्ची चीनी से तैयार की गई रिफाइंड चीनी का निर्यात भी तय सीमा के भीतर किया जा सकेगा. इसके लिए द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय समझौते मान्य होंगे. विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में की गई आपूर्ति को भी निर्यात के रूप में गिना जाएगा. मिलों को हर महीने निर्यात का ब्योरा सरकार के पोर्टल पर देना अनिवार्य होगा.
वहीं, उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक चालू सीजन में अक्टूबर से फरवरी के बीच भारत करीब 3.15 लाख टन चीनी निर्यात कर चुका है. यह कुल स्वीकृत कोटे की तुलना में अभी काफी कम है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में निर्यात की रफ्तार बढ़ानी होगी. बता दें कि इस निर्यात में यूएई भारत से चीनी खरीदने वाला आयातक बनकर उभरा है. (पीटीआई)