Agri Export: प्रोसेस्‍ड और वैल्यू-एडेड उत्पाद बने कृषि निर्यात की नई ताकत, 10 साल में ऐसे बदली तस्‍वीर

Agri Export: प्रोसेस्‍ड और वैल्यू-एडेड उत्पाद बने कृषि निर्यात की नई ताकत, 10 साल में ऐसे बदली तस्‍वीर

भारत ने कृषि निर्यात को सिर्फ चावल और गेहूं तक सीमित रखने के बजाय पिछले एक दशक में प्रोसेस्‍ड और वैल्यू-एडेड उत्पादों पर फोकस बढ़ाया है. APEDA की रणनीति से निर्यात उत्पादों और बाजारों का विस्तार हुआ है, जिससे निर्यात पर लगने वाले प्रतिबंधों के बावजूद सेक्टर अधिक स्थिर और प्रतिस्पर्धी बना है.

agri exportagri export
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 19, 2026,
  • Updated Jun 19, 2026, 1:11 PM IST

घरेलू खाद्य सुरक्षा के दबाव में कई बार चावल और गेहूं जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक या नियंत्रण लगाने के बावजूद भारत का कृषि निर्यात टिकाऊ बना हुआ है. इसकी बड़ी वजह पिछले एक दशक में अपनाई गई वह रणनीति मानी जा रही है, जिसमें पारंपरिक अनाज आधारित निर्यात मॉडल से निकलकर प्रोसेस्‍ड, वैल्यू-एडेड और विविध कृषि उत्पादों पर फोकस बढ़ाया गया. इसी बदलाव ने भारत को वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और नीतिगत फैसलों के असर से काफी हद तक बचाने का काम किया है.

अनाज पर निर्भरता कम करने की बनाई गई रणनीति

एक अधिकारी ने कहा कि लंबे समय तक भारत का कृषि निर्यात मुख्य रूप से चावल, गेहूं और अन्य अनाजों पर टिका रहा. लेकिन, घरेलू मांग और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निर्यात नियंत्रण लागू करने पड़े, जिससे निर्यात आय में अस्थिरता बनी रही. ऐसे में निर्यात टोकरी को बड़ा करने और जोखिम घटाने की दिशा में काम शुरू किया गया.

APEDA ने बढ़ाए उत्पाद और खोले नए बाजार

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने पिछले करीब दस वर्षों में ऐसे कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया, जिनकी वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही थी. इसका नतीजा यह रहा कि भारत से निर्यात होने वाले HS 8-डिजिट श्रेणी के उत्पादों की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 के 298 से बढ़कर 2025-26 में 438 तक पहुंच गई. इसके साथ भारत ने पारंपरिक बाजारों के अलावा कई नए और उभरते देशों में भी अपनी पहुंच मजबूत की.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि कृषि निर्यात में अब केवल कच्चे उत्पादों की हिस्सेदारी नहीं बढ़ रही, बल्कि प्रोसेस्‍ड और वैल्यू-एडेड उत्पाद तेजी से जगह बना रहे हैं. उत्पाद विविधीकरण, नए निर्यात बाजार और वैल्यू एडिशन की संयुक्त रणनीति ने भारतीय कृषि निर्यात को ज्यादा लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाया है.

चावल और गेहूं पर फैसलों ने दिखाया जोखिम

भारत को 2008 के बाद वैश्विक खाद्य कीमतों में तेजी के दौरान दो बार चावल निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़े. वहीं, करीब चार साल के अंतराल के बाद गेहूं निर्यात को सीमित मात्रा और अनुमति आधारित व्यवस्था के साथ आंशिक रूप से दोबारा खोला गया. इससे यह साफ हुआ कि केवल चुनिंदा फसलों पर निर्भर रहना लंबे समय में जोखिम बढ़ा सकता है.

ज्यादा मात्रा के बावजूद कम हुई कमाई

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 21.57 मिलियन टन चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 11.54 अरब डॉलर रही. इससे पिछले वित्त वर्ष में 20.19 मिलियन टन निर्यात से 12.47 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. यानी मात्रा बढ़ने के बावजूद वैश्विक कीमतों में नरमी के कारण निर्यात मूल्य पर दबाव बना रहा.

मई में चावल निर्यात ने दिखाई मजबूती

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में चावल निर्यात का मूल्य 1.02 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 967 मिलियन डॉलर से करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है. अप्रैल 2026 में भी चावल निर्यात मात्रा और मूल्य दोनों में सुधार दर्ज किया गया.

वित्त वर्ष 2025-26 में बासमती चावल का निर्यात 6.52 मिलियन टन रहा और इससे 5.67 अरब डॉलर की कमाई हुई. वहीं, गैर-बासमती चावल का निर्यात 15.04 मिलियन टन रहा, जिसका मूल्य 5.86 अरब डॉलर रहा. अप्रैल 2026 में अकेले बासमती चावल की विदेशी मांग मजबूत बनी रही.

अब निर्यात में प्राइस पर भी ज्‍यादा फोकस

मई 2026 के आंकड़ों में समुद्री उत्पाद, मसाले, फल-सब्जियां, तिलहन और चाय के निर्यात में गिरावट दर्ज हुई. दूसरी ओर मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिली. इसके अलावा सीरियल प्रिपरेशन, प्रोसेस्‍ड फूड, कॉफी और ऑयलमील जैसे उत्पादों ने भी निर्यात को सहारा दिया.

कृषि निर्यात में आ रहा यह बदलाव संकेत देता है कि भारत अब केवल ज्यादा मात्रा बेचने की रणनीति पर नहीं चल रहा, बल्कि ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों और नए बाजारों पर दांव लगा रहा है. यही मॉडल आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि निर्यात की स्थिरता और वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

MORE NEWS

Read more!