
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में किसानों की आय बढ़ाने और अरोमा सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में नई पहल की जा रही है. फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर (FFDC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (IIIM) मिलकर किसानों के लिए इत्र निर्माण से जुड़ी ट्रेनिंग शुरू करने की तैयारी में हैं. जम्मू स्थित CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन में आयोजित एक दिवसीय स्टेकहोल्डर्स मीटिंग के दौरान FFDC के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि किसानों को तीन से पांच दिन के शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए परफ्यूम बनाने की बुनियादी जानकारी दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षण भद्रवाह या बायोटेक पार्क में आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय किसानों को सीधे लाभ मिलेगा. शक्ति विनय शुक्ला ने कहा कि अरोमा उत्पादों के लिए बाजार की कोई कमी नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कन्नौज जैसे छोटे शहर में भी छोटे कारोबारी 70-80 करोड़ रुपये तक का कारोबार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान 50 किलो भी गुणवत्ता वाला उत्पाद तैयार करता है तो उद्योग जगत उसे खरीदने के लिए तैयार है. असली चुनौती उत्पादन की गुणवत्ता और सही प्रजेंटेशन तय करना है. उन्होंने किसानों को कन्नौज स्थित FFDC परिसर का दौरा करने के लिए भी आमंत्रित किया और बताया कि यह संस्थान बिना सरकारी वेतन सहायता के आत्मनिर्भर मॉडल पर काम कर रहा है.
शुक्ला ने भारत के अरोमा सेक्टर की संभावनाओं पर जानकारी देते हुए कहा कि कन्नौज और फ्रांस का ग्रास ऐसे दो शहर हैं, जहां हजारों वर्षों पुरानी इत्र निर्माण की परंपरा आज भी जारी है, जिसे पुरातात्विक और GI साक्ष्यों का समर्थन मिला हुआ है. इस बैठक में अरोमा मिशन के अगले चरण पर भी चर्चा हुई, जिसमें खेती के साथ-साथ वैल्यू एडिशन और बाजार विस्तार पर जोर दिया गया. किसानों को केवल फसल उगाने तक सीमित न रहकर परफ्यूम, अगरबत्ती, रूम फ्रेशनर और ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके.
अरोमा मिशन की नोडल अधिकारी सुफला गुप्ता ने स्वागत भाषण में कहा कि इस बैठक का उद्देश्य मिशन के पहले तीन चरणों की उपलब्धियों की समीक्षा करना और सुधार के नए रास्ते तलाशना है. उन्होंने कहा, "हम अब उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां हमें और ऊंचा लक्ष्य तय करना होगा और इसमें वैल्यू एडिशन की अहम भूमिका होगी.". उन्होंने किसानों के योगदान को सराहते हुए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार समर्पित किया.
बैठक में शामिल एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि किसानों को कन्नौज स्थित FFDC में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए और इसी तरह के कार्यक्रम कठुआ के बायोटेक पार्क में भी आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को उद्योग से जोड़ना राष्ट्रीय प्राथमिकता है और यह प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप है.
इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर सहित पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से किसान, वैज्ञानिक, स्टार्टअप और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी ने मिलकर उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, ब्रांडिंग मजबूत करने और किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की रणनीतियों पर विचार किया. यह बैठक लैवेंडर फेस्टिवल 2026 की तैयारी के लिहाज से भी अहम रही, जिससे क्षेत्र में अरोमा सेक्टर को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. (पीटीआई)