चीनी की MSP बढ़ाने की मांग पर गडकरी बोले, सरकार तय नहीं कर सकती कृषि उपज के दाम

चीनी की MSP बढ़ाने की मांग पर गडकरी बोले, सरकार तय नहीं कर सकती कृषि उपज के दाम

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ग्लोबल इकॉनमी में चीनी समेत कृषि उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति से प्रभावित होती हैं और सरकार के लिए इन्हें तय करना आसान नहीं है. उन्होंने चीनी उद्योग को इथेनॉल, बायोमास और दूसरे वैल्यू एडेड उत्पादों पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि मक्के से इथेनॉल उत्पादन से यूपी-बिहार के किसानों को 45 हजार करोड़ रुपये मिले हैं.

Nitin Gadkari said the goal is to have the barrier-free system, with with a multi-lane free flow (MLFF) system expected to be operational at toll plazas by March. Nitin Gadkari said the goal is to have the barrier-free system, with with a multi-lane free flow (MLFF) system expected to be operational at toll plazas by March.
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Sep 23, 2026,
  • Updated Sep 23, 2026, 1:42 PM IST

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीनी समेत कृषि उत्पादों की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग और आपूर्ति से तय होती हैं. ऐसे में सरकार के लिए कृषि उपज की कीमतों को अपनी मर्जी से निर्धारित करना आसान नहीं है. उन्होंने चीनी उद्योग को केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय इथेनॉल, बायोमास, जैविक खाद और दूसरे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट की तरफ बढ़ने की सलाह दी.

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के एक कार्यक्रम में गडकरी ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति का बड़ा असर होता है.

गडकरी ने कहा, "अब हम ग्लोबल इकॉनमी में हैं और ऐसी इकॉनमी में कोई भी सरकार खेती से जुड़ी उपज के दाम तय नहीं कर सकती, भले ही वह ऐसा करना चाहे."

ब्राजील और भारत की उत्पादन लागत में बताया अंतर

गडकरी ने चीनी के मामले में भारत और ब्राजील की उत्पादन लागत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर मशीनी खेती के कारण ब्राजील में उत्पादन लागत भारत के मुकाबले कम है. उनके मुताबिक ब्राजील में चीनी उत्पादन की लागत करीब 23 रुपये प्रति किलो है, जबकि भारत में यह 33 से 34 रुपये प्रति किलो के आसपास है.

ऐसी स्थिति में ब्राजील में चीनी का उत्पादन अधिक होने पर उसका असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है और इससे भारतीय बाजार पर भी दबाव बनता है.

'कई किसानों के लिए खेती फायदेमंद नहीं'

गडकरी ने किसानों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र की बड़ी समस्या यह है कि कई किसानों के लिए खेती आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गई है. इसलिए केवल उपज की कीमत बढ़ाने के बजाय किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाशने होंगे.

उन्होंने खेती और चीनी उद्योग में इनोवेशन और डायवर्सिफिकेशन पर जोर दिया. गडकरी ने कहा कि चीनी उद्योग को सिर्फ चीनी उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय बाय-प्रोडक्ट्स पर ध्यान देना चाहिए. बायोमास, कृषि अवशेषों से तैयार होने वाले उत्पाद और जैविक खाद जैसे विकल्प किसानों और चीनी मिलों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकते हैं.

इथेनॉल को बताया किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता

गडकरी ने इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की भी जोरदार वकालत की. उन्होंने कहा कि दुनिया के 19 देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है और भारत में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है.

उन्होंने बताया कि उन्हें अक्टूबर में टोयोटा की 100 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली इनोवा के लॉन्च का न्योता मिला है. उनके मुताबिक यह वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल से चल सकेगा और चलते समय बिजली भी पैदा करेगा. गडकरी ने दावा किया कि पेट्रोल की तुलना में इसके इस्तेमाल से ईंधन लागत काफी कम हो सकती है और प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलेगी.

'मक्के से इथेनॉल ने यूपी-बिहार के किसानों को दिए 45 हजार करोड़'

गडकरी ने मक्के से इथेनॉल उत्पादन को किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए कहा कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45 हजार करोड़ रुपये मिले हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने वैकल्पिक ईंधन और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नीतियां बनाई हैं और उद्योग को इन नीतियों का समर्थन करना चाहिए.

पारंपरिक ईंधन कारोबार का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि बदलाव से मौजूदा कारोबार प्रभावित होगा और इसका विरोध भी होगा, लेकिन सरकार की प्राथमिकता किसानों का हित होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कृषि और चीनी उद्योग को भविष्य में टिकाऊ बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जिसमें किसान केवल फसल बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि इथेनॉल, बायोमास और दूसरे वैल्यू एडेड उत्पादों से भी उनकी आमदनी बढ़े.

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