
चीनी के बढ़ते दामों ने थोक से लेकर फुटकर व्यापारियों तक की चिंता बढ़ा दी है. कुछ समय पहले जहां चीनी करीब 40 से 45 रुपये किलो के आसपास बिक रही थी. वहीं, अब कई बाजारों में इसका भाव 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है. अचानक बढ़े दामों का असर आम लोगों की रसोई के बजट पर भी पड़ने लगा है. मुजफ्फरनगर में एशिया की सबसे बड़ी चीनी मंडियों में से एक है. यहां के थोक व्यापारियों के मुताबिक चीनी के दाम बढ़ने के पीछे उत्पादन में कमी, सीमित स्टॉक और इथेनॉल की और चीनी का इस्तेमाल बढ़ना प्रमुख कारण हैं. इसके अलावा आने वाले त्योहारों को देखते हुए चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है.
थोक व्यापारी संजय मित्तल के मुताबिक, चीनी मिलों का सीजन शुरू होने के समय चीनी का भाव करीब 3,900 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था. अब यह बढ़कर करीब 6,500 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. उनका कहना है कि सरकार ने स्टॉक लिमिट की अवधि को कम किया है और स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में तेजी बनी हुई है. व्यापारियों का कहना है कि इस बार चीनी का उत्पादन कम हुआ है. महाराष्ट्र जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके अलावा गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने से चीनी के लिए उपलब्ध स्टॉक पर भी असर पड़ा है.
व्यापारियों के मुताबिक सरकार ने चीनी के आयात की अनुमति देने की दिशा में कदम उठाया है. उनका मानना है कि अगर बाहर से चीनी आती है और बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में कीमतों पर कुछ दबाव कम हो सकता है. हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि अगर कीमतों को तेजी से नियंत्रित करना है तो सरकार को और बड़े कदम उठाने होंगे. थोक व्यापारी संजय मिश्रा ने बताया कि पिछले 15-20 दिनों में चीनी के भाव में करीब 18 से 20 रुपये प्रति किलो तक की तेजी देखने को मिली है. उन्होंने कहा कि स्टॉक कम होने के साथ-साथ त्योहारों की मांग भी बढ़ रही है. रक्षाबंधन, जन्माष्टमी के बाद आगे दीपावली जैसे त्योहार आने हैं. ऐसे में चीनी की खपत बढ़ने की संभावना है.
उन्होंने कहा कि चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ चाय तक सीमित नहीं रहेगा. बिस्कुट, मिठाई और कई दूसरे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है. इससे आम आदमी का घरेलू बजट और बिगड़ सकता है.
फुटकर व्यापारी नितिन कुमार के मुताबिक, चीनी महंगी होने से बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है. ग्राहक जब 60 रुपये से ज्यादा किलो का भाव सुनता है तो उसे पहले की तुलना में ज्यादा महंगा महसूस होता है. उनके अनुसार करीब दो महीने पहले चीनी 40 से 45 रुपये किलो के आसपास थी, जबकि अब इसका भाव काफी बढ़ चुका है. एक अन्य फुटकर व्यापारी राजीव गौतम ने बताया कि पहले 40-45 रुपये किलो बिकने वाली चीनी अब 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है. महंगाई बढ़ने पर ग्राहक अपनी खरीदारी कम कर देता है, जो ग्राहक पहले तीन-चार किलो चीनी खरीदता था, वह अब एक किलो तक सीमित हो सकता है.
व्यापारी विजय के मुताबिक, करीब एक महीने पहले चीनी का भाव 46-47 रुपये किलो के आसपास था. इसके बाद 10-12 दिनों के अंदर करीब 15-20 रुपये किलो तक की तेजी देखने को मिली. उनका कहना है कि इतनी तेज बढ़ोतरी आम ग्राहक के बजट पर सीधा दबाव डालती है. व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में त्योहारों के कारण चीनी की मांग और बढ़ेगी. ऐसे में अगर बाजार में सप्लाई नहीं बढ़ी या सरकार ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया तो चीनी के दाम में फिलहाल राहत मिलना मुश्किल हो सकता है. फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतों ने व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ा दी है. लोगों को उम्मीद है कि सरकार चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाएगी.