
मिठाई के रूप में गुड़ का प्रयोग वैसे तो सदियों पुराना रहा है, लेकिन समय के साथ-साथ यह पीछे छूट गया और चीनी आगे निकल गई. चीनी के बढ़ते प्रयोग ने जहां मिठाई को अलग रूप रंग के साथ-साथ खूबसूरत भी बनाया, तो उसके कुछ दुष्प्रभाव भी दिखे. चीनी के बढ़ते दुष्प्रभाव के चलते लोग अब फिर से गुड़ से बनी मिठाइयों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. इसी में राजधानी लखनऊ से 40 किलोमीटर दूर रामसनेहीघाट की गुड़ की बर्फी काफी फेमस है. इस बर्फी को बनाने वाले किसान सुरेश यादव कहते हैं उनकी बर्फी के दीवाने पूरे देश में है. उन्होंने एक दशक पहले गुड़ बनाने का काम शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने इसमें कई तरह के प्रयोग भी किए. इसी दौरान उन्होंने मसालेदार बर्फी बनाने का काम शुरू किया जो लोगों को खूब पसंद आई. आज उनकी बर्फी खरीदने के लिए लोग लाइन लगाकर घंटों दुकान पर इंतजार करते हैं. यहां तक कि दूर दराज से यहां पर बर्फी खरीदने के लिए आते भी हैं. गुड़ से बनने वाली इस मिठाई के दीवाने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हैं.
बाराबंकी के रामसनेहीघाट के रहने वाले गन्ना किसान सुरेश यादव ने बताया कि चीनी की बर्फी तो आपने बहुत खाई होगी, लेकिन गुड़ से बनने वाली उनकी इस खास मिठाई में तिल, सोंठ, अजवाइन, मूंगफली और बादाम मिलाया जाता है. इसके चलते बर्फी का स्वाद काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इस मिठाई को तैयार करने के लिए गन्ने के रस को एक बड़े बर्तन में लेकर भट्टी में गर्म किया जाता है. जब रस गुड़ के आकार में आ जाता है तो उसमें मेवा मिलकर ठंडा किया जाता है. यहां तैयार होने वाली मसालेदार बर्फी ठंड के मौसम में ही बनाई जाती है. इसकी बिक्री अप्रैल तक होती है.
मसाला बर्फी केवल मिठाई नहीं बल्कि यह एक औषधि भी है. ठंड के दिनों में अगर इसका नियमित सेवन किया जाए तो बच्चों से लेकर बड़ों में ठंड नहीं लगती है. दुकानदार सुरेश यादव बताते हैं कि बर्फी से शरीर में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस की कमी नहीं होती है. इस बर्फी के नियमित सेवन से सर्दी, जुकाम और पेट के रोग में फायदा होता है. इसी वजह से सर्दियों के सीजन में इसकी बिक्री दोगनी हो जाती है.
सुरेश यादव बताते हैं कि उनके इस गुड़ को मधुमेह से पीड़ित लोग भी बिना किसी भय के खाते हैं क्योंकि यह पूरी तरीके से केमिकल रहित है. गुड़ की मिठाई का प्रयोग करने वाले अनुराग कुमार का कहना है कि वे कई साल से इस गुड़ को खा रहे हैं. इस गुड़ में किसी भी तरह की मिलावट नहीं रहती है. इस गुड़ के प्रयोग से उनका पेट भी ठीक रहता है.
रामसनेहीघाट के सुरेश यादव की गुड़ से बनने वाली मसाला बर्फी की डिमांड आज पूरे देश में है. इसके अलावा वे गन्ने के राब, गन्ने के रस से सिरका को भी तैयार करते हैं. प्रदेश ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी उनके इस गुड़ की मांग होती है. 10 साल पहले शुरू किया गया उनका यह गुड़ का कारोबार आज लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में हो चुका है.