
बिहार के खेतों से निकालकर विश्व के कई देशों तक अपनी पहुंच बनाने वाले मखाना को किसी अन्य वैज्ञानिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है. बिहार के उद्यान निदेशालय को मखाना वैल्यू चैन के लिए गोल्डन पीकॉक इनोवेटिव प्रोडक्ट/सर्विस अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया है. इसके बाद से कृषि विभाग में खुशी की लहर है.
बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर्स (आईओडी) द्वारा पुरस्कार की 4 अप्रैल को जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गई. इस पुरस्कार का निर्णय भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उदय यू. ललित की अध्यक्षता वाली एक प्रतिष्ठित जूरी ने किया है. यह पुरस्कार उद्यान निदेशालय के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मददगार साबित होगा.
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय ने अपने प्रयास से मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने में कामयाबी पाई है. इस प्रयास से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, क्वालिटी मानकों में सुधार आया है. अब बिहार का मखाना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभर रहा है.
उद्यान निदेशालय के निदेशक अभिषेक कुमार को गोल्डन पीकॉक इनोवेटिव प्रोडक्ट/सर्विस अवार्ड पुरस्कार से सम्मानित होने के लिए पत्र भेजा गया है. उद्यान निदेशालय को गोल्डन पीकॉक अवार्ड की ट्रॉफी और प्रमाण-पत्र जल्द ही नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में दी जाएगी. यह सम्मान बिहार सरकार के उद्यानिकी क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की निरंतर सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देता है.
बिहार के खेतों से निकलकर विश्व के अधिकांश देशों तक अपनी पहुंच बनाने वाले सुपर फूड मखाना के क्षेत्र विस्तार को लेकर सरकार ने कृषि रोड मैप 2026 से 2031 के बीच इसकी खेती का क्षेत्रफल 70 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा है.आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार बिहार में हाल के समय में 40 हजार हेक्टेयर में मखाना की खेती हो रही है. 32 हजार एमटी मखाना का निर्यात हाल के समय में हो रहा है और इसे 1 लाख 25 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है.
अगर मखाना, शहद और मशरूम की बात करें तो बागवानी की खेती में इनकी हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत के आसपास है और उत्पादन में 7 प्रतिशत है.