
धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जनपद के बर्थराकला गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रहे इस विशेष अभियान का यह 56वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी जानकारियां हासिल कीं.
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपनी आय बढ़ा सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं.
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक तकनीक और खेती के नए तरीकों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों पर विशेष जोर दिया.
कार्यक्रम में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली. किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
किसान कारवां के पहले चरण में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि दुधारू पशुओं के लिए कई योजनाएं संचालित हैं. उन्होंने किसानों से अपील की कि गेहूं कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष को जलाने के बजाय गौशालाओं में भूसा दान करें. इसके बदले उन्हें गोबर से बनी खाद दी जाएगी, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी.
दूसरे चरण में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि किसान सम्मान निधि और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाएं किसानों के लिए लाभकारी हैं. उन्होंने कहा कि उड़द और मूंग के बीज कृषि विभाग में उपलब्ध हैं, जिन पर सरकार द्वारा अनुदान दिया जा रहा है.
सैयदराजा विधायक सुशील कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से किसानों की आय में सुधार हुआ है. उन्होंने कर्जमाफी और अन्य योजनाओं को किसानों के लिए बड़ी राहत बताया.
चौथे चरण में प्रगतिशील किसान इंद्र सेन सिंह ने बताया कि अगेती फसलों जैसे मक्का, मटर और सब्जियों की खेती से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलता है, जिससे आय में वृद्धि होती है.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ. प्रतीक सिंह ने बताया कि सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से 90% तक बछिया होने की संभावना रहती है. इससे पशुधन की गुणवत्ता और दूध उत्पादन दोनों बढ़ते हैं.
छठे चरण में मृदा वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है. उन्होंने ढैचा जैसी हरी खाद और गोबर खाद के उपयोग की सलाह दी.
सातवें चरण में मत्स्य बंधु एफपीओ के मदनजीत सिंह ने बताया कि मछली पालन किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन रहा है. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ आय बढ़ती है बल्कि भूमिगत जल स्तर में भी सुधार होता है.
आठवें चरण में प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि एफपीओ के माध्यम से किसान अपनी फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है.
नौवें चरण में उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम ने कहा कि सब्जी उत्पादन से किसानों को गेहूं और धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है. उन्होंने किसानों को सब्जी खेती बढ़ाने की सलाह दी.
दसवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि चंदौली में जलभराव वाले क्षेत्रों में मखाना और सिंघाड़ा की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं. उन्होंने किसानों को इन फसलों को अपनाने की सलाह दी.
ग्यारहवें चरण में वरिष्ठ संवाददाता जयप्रकाश सिंह ने कहा कि ‘किसान तक’ चैनल किसानों की आवाज को मजबूती से उठाने का काम कर रहा है. उन्होंने समाज में किसानों को सम्मान देने और युवाओं को खेती से जोड़ने पर जोर दिया.
बारहवें चरण में ईशानी एफपीओ के अजय कुमार सिंह ने बताया कि उनके संगठन से जुड़े किसान बीज उत्पादन के जरिए अच्छी आय कमा रहे हैं. उन्होंने पारंपरिक धान किस्म ‘आदम चीनी’ के संरक्षण की जानकारी भी दी.
तेरहवें चरण में कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया. इसमें ₹500 के 10 पुरस्कार, ₹2000 का द्वितीय पुरस्कार सीमा देवी और ₹3000 का प्रथम पुरस्कार अनीता पाल को मिला.
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