महाराष्‍ट्र के किसानों के लिए बड़ी खबर: फसल लोन, कर्जमाफी से लेकर मॉनसून-खेती तक, CM फडणवीस ने दिया बयान

महाराष्‍ट्र के किसानों के लिए बड़ी खबर: फसल लोन, कर्जमाफी से लेकर मॉनसून-खेती तक, CM फडणवीस ने दिया बयान

महाराष्ट्र में खरीफ सीजन से पहले किसानों को लेकर सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं. फसल लोन पर CIBIL स्कोर की शर्त हटाने, कर्जमाफी लागू करने और कमजोर मॉनसून की आशंका के बीच सरकार की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अहम जानकारी दी है.

CM Devendra FadanvisCM Devendra Fadanvis
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 21, 2026,
  • Updated May 21, 2026, 5:42 PM IST

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि फसल लोन मंजूर करते समय किसानों के CIBIL स्कोर (क्रेडिट स्‍कोर) को आधार नहीं बनाया जाएगा. राज्य सरकार ने सभी बैंकों को मुख्यालय से लेकर शाखा स्तर तक स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को CIBIL स्कोर के कारण परेशान नहीं किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि फसल ऋण को CIBIL शर्तों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

30 जून से पहले लागू होगी कर्ज माफी योजना

बैठक में कृषि लोन और किसान कर्जमाफी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा वादा की गई कृषि लोन माफी योजना जल्द लागू की जाएगी. उन्होंने बताया कि कैबिनेट स्तर पर इसको लेकर चर्चा हो चुकी है और बाकी जिलों का डेटा मिलते ही 30 जून से पहले योजना लागू कर दी जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलेगी.

कमजोर मॉनसून की आशंका पर कही ये बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का रकबा करीब 152 लाख हेक्टेयर है, जिसमें अकेले सोयाबीन और कपास की हिस्सेदारी लगभग 88 लाख हेक्टेयर है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार मानसून चुनौतीपूर्ण रह सकता है. अनुमान के अनुसार राज्य में सामान्य औसत का करीब 88 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है, लेकिन बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में समान नहीं रहेगा.

उन्होंने कहा कि पश्चिम विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है. शुरुआती पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर के बीच बारिश धीरे-धीरे कम हो सकती है, जिससे लंबे ड्राई स्पेल बनने और फसलों पर तनाव बढ़ने का खतरा रहेगा.

जल संरक्षण और वैकल्पिक योजना पर रहेगा जोर

संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जलयुक्त शिवार योजना के कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद बारिश के पानी को बचाना और जरूरत पड़ने पर किसानों को सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध कराना है.

साथ ही जिला प्रशासन को आकस्मिक योजना तैयार करने और मौसम के बदलते हालात के अनुसार सहनशील बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है. राज्य में सोयाबीन, कपास, मक्का, धान, तुअर और बाजरा के पर्याप्त बीज उपलब्ध हैं और प्रमाणित बीजों की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी.

खाद बेचने में जबरदस्ती करने वालों पर होगी सख्ती

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में करीब 48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. उन्होंने खाद विक्रेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को जबरदस्ती अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसान केवल DAP खरीदना चाहता है तो उसे अन्य चार उत्पाद लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए. 

इसी तरह यूरिया खरीदने पर भी अतिरिक्त सामान लेने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. सरकार ने इस मामले में सख्त नीति अपनाई है और नियम उल्लंघन के आरोप में 400 से ज्यादा उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा चुके हैं.

AI ऐप और डिजिटल कृषि पहल की शुरुआत

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई डिजिटल कृषि योजनाओं की भी शुरुआत की. इनमें "महाविस्तार 2.0" ऐप शामिल है, जिसमें AI तकनीक के जरिए किसानों को स्थानीय भाषा में फसल पैटर्न, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान और बाजार भाव की जानकारी मिलेगी. इसके अलावा "क्रॉपसैप" प्लेटफॉर्म के जरिए किसान फसल की फोटो अपलोड कर सकेंगे और उन्हें फसल की स्थिति, रोग या कीट हमले और उपचार संबंधी जानकारी मिलेगी.

राज्य सरकार ने डिजिटल क्रॉप सर्वे सिस्टम भी शुरू किया है. इसके तहत किसान मोबाइल फोन से सीधे अपनी फसल का डेटा अपलोड कर सकेंगे. सरकार का मानना है कि इससे फसल बीमा रिकॉर्ड और क्लेम प्रक्रिया ज्यादा सटीक बनेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों के किसान नेटवर्क उपलब्ध होने पर बाद में भी फसल से जुड़ी तस्वीरें अपलोड कर सकेंगे.

डिजिटल वॉलेट और QR ट्रेसबिलिटी पर फोकस

राज्य सरकार ने CBDC आधारित भुगतान व्यवस्था भी शुरू की है. इसके तहत सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे किसानों के डिजिटल वॉलेट में पहुंचेगा. विक्रेताओं को भुगतान भी वास्तविक खरीदारी होने के बाद ही किया जाएगा. सरकार QR कोड आधारित ट्रेसबिलिटी सिस्टम भी लागू कर रही है. इसके जरिए खरीदार यह जान सकेंगे कि कोई कृषि उत्पाद किस गांव और किस खेत में उगाया गया है. साथ ही उससे जुड़े प्रमाणपत्रों की जानकारी भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि निर्यात के मामले में महाराष्ट्र ने बड़ी प्रगति की है. उनके अनुसार देश के कुल अंगूर निर्यात में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 94 प्रतिशत, केले के निर्यात में 86 प्रतिशत और प्याज निर्यात में 85 प्रतिशत है. उन्होंने MahaDBT योजना का भी जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2025-26 में इसके जरिए 91,659.50 करोड़ रुपये की सहायता किसानों तक पहुंचाई गई है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला है. (पीटीआई)

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