महाराष्ट्र में सूखे की मार, सोयाबीन की फलियां खाली, मुआवजे के लिए सड़कों पर किसान

महाराष्ट्र में सूखे की मार, सोयाबीन की फलियां खाली, मुआवजे के लिए सड़कों पर किसान

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है. सोयाबीन की फलियां खाली रहने और कपास-अरहर को नुकसान की आशंका के बीच किसान सूखा घोषित करने और ₹50 हजार प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रभावित खेतों का दौरा किया, वहीं रोहित पवार और नितीन देशमुख ने सरकार पर निशाना साधते हुए तत्काल आर्थिक सहायता की मांग की है.

Maharashtra Drought 2026Maharashtra Drought 2026
धनंजय साबले
  • अकोला/नांदेड/चंद्रपुर/छत्रपतिसंभाजी नगर/लातूर,
  • Sep 24, 2026,
  • Updated Sep 24, 2026, 4:40 PM IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखने लगी हैं. सबसे ज्यादा चिंता सोयाबीन को लेकर सामने आ रही है. कई जगह पौधों पर फलियां तो लगी हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि उनमें दाना नहीं भर पाया है. ऐसे हालात के बीच सूखा घोषित करने और किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग तेज हो गई है.

लातूर जिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निलंगा तहसील के जाऊ और खरोसा गांवों में पहुंचकर प्रभावित खेतों का जायजा लिया. इस दौरान एक किसान अपनी फसल की हालत बताते हुए भावुक हो गया और मुख्यमंत्री के गले लगकर रो पड़ा. किसान ने बताया कि सोयाबीन की खेती पर प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपये और प्रति हेक्टेयर करीब 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल सूख गई. किसान ने सरकार से नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की.

वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने मुख्यमंत्री के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे को लेकर सरकार पर निशाना साधा. पवार ने मुख्यमंत्री और किसानों के बीच सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों और मजदूरों को सीधे अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए.

रोहित पवार ने सरकार से किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी और गैर-सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों की पूरी फीस माफ करने की मांग भी उठाई. पवार ने विभागीय आयुक्त से मिलकर मांग पत्र सौंपा और बीड में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

विदर्भ में भी खेतों तक पहुंचा संकट

विदर्भ के अकोला और बुलढाणा में भी सोयाबीन किसानों की परेशानी बढ़ रही है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खेतों का दौरा कर किसानों से उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान किसानों ने उन्हें खराब हो चुकी फसल दिखाई. एक किसान ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताते हुए दावा किया कि खेती के लिए पैसा जुटाने के लिए उसे पत्नी का मंगलसूत्र तक गिरवी रखना पड़ा.

शिंदे ने किसानों को भरोसा दिलाया कि मौजूदा संकट को देखते हुए सरकार मदद करेगी और किसानों को त्योहारों के समय मुश्किल हालात में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा.

अमरावती डिविजन में करीब 30.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई बताई गई है. इसमें करीब 13.78 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, 11.03 लाख हेक्टेयर में कपास और 4.66 लाख हेक्टेयर में अरहर की खेती शामिल है. कृषि विभाग के अधिकारी गणेश घोरपड़े ने बारिश की कमी के चलते सोयाबीन में 50 से 60 प्रतिशत और कपास और अरहर में 40 से 50 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका जताई है.

नांदेड़ के किसान की चुनौती, 'एक किलो सोयाबीन दिखाओ'

नांदेड़ जिले के दाभड़ गांव से किसानों की बदहाली को दिखाता एक मामला सामने आया है. किसान आत्माराम टेकाले और उनकी पत्नी कसाबाई टेकाले का दावा है कि उनके खेत में सोयाबीन के पौधों पर फलियां तो हैं, लेकिन उनमें दाना नहीं है.

परिवार के मुताबिक उन्होंने खेती के लिए बैंक से कर्ज लेने की बजाय गहने बेचकर पैसे जुटाए थे. अब बारिश की कमी से फसल खराब होने के बाद बीज, खाद, कीटनाशक और दूसरी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है. किसान का अपनी फसल की स्थिति दिखाते हुए बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने एक किलो सोयाबीन के बदले एक क्विंटल काजू-बादाम देने की बात कहकर अपनी फसल की हालत बताने की कोशिश की.

अकोला में आंदोलन का अल्टीमेटम

अकोला में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) विधायक नितीन देशमुख ने किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग उठाई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि 5 अक्टूबर तक किसानों को राहत नहीं मिली तो किसानों के साथ समृद्धि महामार्ग पर आंदोलन किया जाएगा.

अकोला जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकालने की तैयारी भी है. आयोजकों का दावा है कि किसान बैलगाड़ियों और सूखी सोयाबीन की फसल लेकर इसमें शामिल होंगे और 10 हजार से अधिक किसान और शिवसैनिक प्रदर्शन में पहुंच सकते हैं.

लातूर के शिरूर अनंतपाल में भी किसानों ने अलग तरीके से विरोध दर्ज कराया. किसानों ने रैली निकालने के बाद तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार की मेज पर सूखी सोयाबीन की फसल रखी और जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग का ज्ञापन सौंपा.

किसान के रूप में गणपति बप्पा

सूखे और किसानों के संकट के बीच चंद्रपुर में गणेशोत्सव की एक झांकी ने भी खेती-किसानी की समस्याओं को केंद्र में रखा. पानी टंकी परिसर के युवा गणेश मंडल ने गणपति बप्पा को किसान के रूप में खेत में हल चलाते हुए दिखाया. झांकी के जरिए कमजोर मॉनसून, फसल नुकसान, किसानों की आर्थिक परेशानियों और खेती से जुड़े संकट को सामने लाने का प्रयास किया गया.

महाराष्ट्र में बारिश की कमी के बीच अब किसानों की निगाह सरकार के अगले कदम पर है. खेतों से लेकर सड़कों तक मुआवजे और सूखा घोषित करने की मांग उठ रही है. ऐसे में सवाल यह है कि फसल नुकसान का आकलन करने के बाद सरकार किसानों के लिए कितना और किस रूप में राहत पैकेज घोषित करती है.

(इसरारुद्दीन चिस्ती, कुअरचंद मंडले, विकास राजूरकर, अनिकेत जाधव का इनपुट)

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