
बौद्ध और जैन तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध, राप्ती नदी के किनारे बसे श्रावस्ती जनपद के गिलौला ब्लॉक के ककंधू में ‘किसान तक’ के किसान कारवां का 45वां पड़ाव रहा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. इसके साथ ही किसानों से सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के परिप्रेक्ष्य में केवीके की उपयोगिता सहित बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती करने के अलग-अलग चरणों के बारे में जानकारी दी गई.
धान, गेहूं, मक्का और गन्ना जैसी प्रमुख फसलें तराई क्षेत्र वाले श्रावस्ती जनपद का आर्थिक आधार हैं. कृषि और ग्रामीण विकास पर केंद्रित जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को आय दोगुनी करने से जुड़ी प्रमुख जानकारियां दी गईं. इसके साथ ही विभिन्न फसलों के वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर किसान अपनी आमदनी किस तरह बढ़ा सकते हैं, इस विषय पर भी चर्चा की गई. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 14 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला.
पहले चरण में कृषि विभाग के एडीओ गिलौला लवकुश वर्मा ने किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिन किसानों को किसी कारणवश योजना की राशि नहीं मिल पा रही है, वे सबसे पहले अपने बैंक खाते को आधार से लिंक अवश्य करवा लें. कई किसानों का भुगतान केवल आधार से बैंक खाते के लिंक न होने के कारण रुका हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि फार्मर रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से भी कई किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. इसलिए किसान अपने सभी दस्तावेजों का समय रहते सुधार अवश्य करा लें. इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि कृषि विभाग की ओर से बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. जो किसान जायद सीजन में मक्का की खेती करना चाहते हैं, वे हाइब्रिड मक्का बीज कृषि विभाग से डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान पर प्राप्त कर सकते हैं.
दूसरे चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी श्रावस्ती, डॉ. सुनील कुमार सिंह ने नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (25 गाय यूनिट पर 50% सब्सिडी), मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना तथा मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पशुपालकों को मिलने वाले लाभों की जानकारी दी. इसके साथ ही किसानों को पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया.उन्होंने आगे किसानों को सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग से होने वाले लाभों के बारे में भी जानकारी दी. इसके अलावा उन्होंने सरकार द्वारा चलाए जा रहे निशुल्क टीकाकरण के बारे में भी किसानों को बताया.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र श्रावस्ती के वैज्ञानिक डॉ. राम भरोसे ने किसानों से कहा कि सबसे पहले वे अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं. किसान खेत में कितनी भी मेहनत कर लें, अच्छे बीज, समय पर सिंचाई और उर्वरकों का उपयोग करें, लेकिन यदि मिट्टी की स्थिति अच्छी नहीं होगी तो उत्पादन में कमी आएगी. इसलिए सरकार द्वारा मिट्टी की जांच निशुल्क कराई जा रही है, अतः किसान अपनी मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. आगे उन्होंने कहा कि यदि किसानों को मिट्टी की ताकत बढ़ानी है और उत्पादन में वृद्धि करनी है, तो फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन) को अवश्य करें.
चौथे चरण में कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों को बीज चयन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान खेती के दौरान सही बीज का चयन करें, ताकि उत्पादन बेहतर हो सके.इसके साथ ही उन्होंने किसानों को अपने खेत को समतल करने के लिए लेजर लैंड लेवलर मशीन का उपयोग करने की सलाह दी.उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से फसल की सिंचाई समान रूप से होती है.साथ ही किसानों को ढैंचा की खेती करने के लिए भी प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि ढैंचा की खेती से मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ती है.
पांचवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की.उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने भारत विस्तार प्लेटफार्म के बारे में जानकारी दिया और इसके महत्व को बताया.
छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल प्रताप सिंह दोहरे ने किसानों से कहा कि खेती के साथ पशुपालन करना बेहद जरूरी है. उन्होंने किसानों को गोबर को व्यवस्थित रूप से एकत्रित करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों को एक ओर दूध प्राप्त होगा, वहीं दूसरी ओर गोबर से बनने वाली जैविक खाद भी मिलेगी, जो खेती के लिए काफी लाभदायक होती है.उन्होंने किसानों को गोबर की खाद बनाने के सही तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसके साथ ही जैविक खेती के महत्व और उसके फायदे भी विस्तार से समझाए.डॉ. दोहरे ने कहा कि यदि किसान शुद्ध और रसायनमुक्त सब्जियां खाना चाहते हैं, तो वे किचन गार्डनिंग अपनाकर अपने घर पर ही शुद्ध सब्जियों का उत्पादन कर सकते हैं.
सातवें चरण में गिलौला के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह ने पशुओं में होने वाले विभिन्न रोगों के बारे में किसानों को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यदि किसान पशुपालन से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो उन्हें अच्छी नस्ल के पशुओं का चयन करना चाहिए, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सकती है.उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान समय में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) रोग का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, इसलिए सभी किसान अपने पशुओं को समय पर टीका अवश्य लगवाएं. इसके साथ ही उन्होंने लंपी रोग के लक्षण, बचाव और टीकाकरण के फायदे के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.
आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, श्रावस्ती के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार ने किसानों से कहा कि खेती को उद्योग की तरह अपनाएं - ₹1 लगाइए और ₹4 कमाइए की सोच के साथ काम करें. उन्होंने बताया कि अब किसानों को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है. आज खेती केवल जमीन वाले किसान ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हाइड्रोपोनिक जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भी किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
अंतिम नौवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और तीन विजेता को 1000 रुपये दिए गए. वहीं दो हजार रुपए की राशि पानकली महिला को दिया गया. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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