
जम्मू-कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) की अहम भूमिका सामने आई है. इस परियोजना पर बने चिनाब रेल ब्रिज और देश के पहले केबल-स्टेड अंजी खड्ड ब्रिज ने कश्मीर घाटी को देश के राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ दिया है. इससे घाटी के सेब, चेरी, सूखे मेवे और हस्तशिल्प को देश के अलग-अलग हिस्सों के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है. साथ ही, रोजमर्रा की जरूरतों का सामान और औद्योगिक आपूर्ति भी श्रीनगर तक पहुंचाना आसान हुआ है.
श्रीनगर से जम्मू के बीच वंदे भारत ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सफर पहले के मुकाबले आसान हुआ है. इस ट्रेन से श्रीनगर से जम्मू तक की यात्रा करीब 4 घंटे 45 मिनट में पूरी की जा सकती है, जबकि सड़क मार्ग से इस सफर में लगभग 10 घंटे लगते हैं. पिछले साल 4 जून को शुरू हुई इस रेल सेवा से यात्रियों को आवाजाही का एक नया विकल्प मिला है.
‘आज तक’ की टीम ने भी श्रीनगर से जम्मू तक वंदे भारत ट्रेन में सफर किया और यात्रियों से बातचीत की. यात्रियों ने ट्रेन की सुविधाओं और यात्रा के अनुभव पर खुशी जताई. बातचीत के दौरान कुछ यात्रियों ने भारतीय रेलवे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया. इस रेल सेवा से अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वैष्णो देवी की यात्रा भी अधिक सुविधाजनक हुई है.
272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना से कश्मीर घाटी और देश के अन्य हिस्सों के बीच परिवहन संपर्क मजबूत हुआ है. रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से घाटी के कृषि उत्पादों और स्थानीय कारोबार से जुड़े सामान को प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल रही है. सेब, चेरी, सूखे मेवे और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों की आपूर्ति के लिए यह रेल संपर्क अहम है. दूसरी ओर, सीमेंट, अनाज, खाद, दूध और ऑटोमोबाइल जैसी वस्तुओं को भी घाटी तक पहुंचाने में रेल परिवहन से मदद मिल रही है.
वेस्टर्न रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विनीत अभिषेक ने बताया कि पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की ऊंची पहाड़ियों, गहरी घाटियों और नदियों के कारण बनिहाल से कटरा के बीच 111 किलोमीटर का रेल खंड लंबे समय तक अधूरा रहा. भारतीय रेलवे ने इन भौगोलिक चुनौतियों के बीच निर्माण कार्य पूरा करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास किया. चिनाब रेल ब्रिज और अंजी खड्ड ब्रिज इसी परियोजना के प्रमुख निर्माण कार्यों में शामिल हैं.
इस परियोजना के निर्माण के दौरान ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक पहुंचने के लिए रेलवे ने अपने बजट से सड़कें भी बनाईं. निर्माण कार्य में आसपास के निवासियों से मदद ली गई और उन्हें वर्षों तक रोजगार के अवसर भी मिले. दुर्गम इलाकों में सड़कों और अन्य निर्माण सुविधाओं के विकास ने रेल परियोजना के काम को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई.
कश्मीर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली इस परियोजना से यात्रियों की आवाजाही के साथ-साथ माल परिवहन को भी सुविधा मिली है. इससे कृषि उत्पादों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने और जरूरी वस्तुओं की घाटी में आपूर्ति को आसान बनाने में मदद मिल रही है. चिनाब और अंजी खड्ड ब्रिज इस रेल संपर्क के प्रमुख हिस्से हैं, जिनके जरिए कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. (धर्मेंद्र दुबे की रिपोर्ट)