
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड यानी NFCSF के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान भारत का चीनी उत्पादन 15 जनवरी तक 158.85 लाख टन (lt) तक पहुंच गया. ये आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि के 130.60 lt से 22 प्रतिशत अधिक है. महाराष्ट्र में तो चीनी उत्पादन में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन दूसरे राज्यों में पिछले साल के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी ही हुई है. वहीं बिहार, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश कुछ ऐसे राज्य हैं जहां उत्पादन में कमी आई है.
आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र में चीनी का प्रोडक्शन 64.60 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 43.05 लाख टन से 50 परसेंट ज़्यादा है. लेकिन उत्तर प्रदेश, जो भारत में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक है, वहां उत्पादन 7 फीसदी से भी कम बढ़कर 45.70 लाख टन हो गया, जो पिछले साल 42.85 लाख टन था. कर्नाटक में भी 27.10 लाख टन के मुकाबले 30.70 लाख टन उत्पादन हुआ है, जो लगभग 13 प्रतिशत ज्यादा है. इस सीजन में अब तक देश में कुल चीनी प्रोडक्शन में इन तीनों टॉप राज्यों का हिस्सा लगभग 89 प्रतिशत है.
पैदावार के अपडेट पर, NFCSF (नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड) ने अंग्रेजी अखबार 'बिजनेसलाइन' की एक रिपोर्ट में बताया कि मौजूदा सीजन में 15 जनवरी तक 519 चालू शुगर मिलों ने 9.01 फीसदी के रिकवरी रेट के साथ 1,763.74 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले साल इसी समय 514 मिलों ने 8.80 प्रतिशत के रिकवरी रेट के साथ 1,484.04 लाख टन गन्ने की पेराई की थी. रिकवरी रेट का मतलब है गन्ने से बनने वाली असल चीनी और 9 परसेंट रिकवरी रेट का मतलब है 100 किलो गन्ने से 9 किलो चीनी.
इस साल कर्नाटक में रिकवरी पिछले साल के 8.50% के मुकाबले 8.05% कम है और महाराष्ट्र में यह 8.80 प्रतिशत के मुकाबले मामूली बढ़कर 9 फीसदी हो गई है. लेकिन उत्तर प्रदेश में रिकवरी 9.05 परसेंट से बढ़कर 9.80 परसेंट हो गई है. इस बीच, सरकार ने मौजूदा सीजन में एक्सपोर्ट कोटा के री-अलॉटमेंट का तीसरा ऑर्डर जारी किया, क्योंकि कुछ मिलों ने उन परमिट को दूसरी मिलों की घरेलू मासिक रिलीज मात्रा के साथ बदलने के लिए आवेदन किया था.
बताया जा रहा है कि तीसरे ऑर्डर में 16 मिलों ने 13 फैक्ट्रियों के डोमेस्टिक कोटे के साथ एक्सचेंज करके 52,270 टन का अपना एक्सपोर्ट कोटा सरेंडर कर दिया है. पहले के दो ऑर्डर में सरकार ने 29,174 टन और 85315 टन एक्सचेंज करने की इजाजत दी थी. खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2025 में एक तय फॉर्मूले के तहत मिल के हिसाब से मात्रा तय करके 15 लाख टन चीनी के एक्सपोर्ट की घोषणा की थी. फैक्ट्रियों को 30 सितंबर तक शिपमेंट पूरा करने की इजाजत है.
FAQ:
Q1. NFCSF क्या है?
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड देश की सहकारी चीनी मिलों की शीर्ष संस्था है.
Q2. NFCSF का मुख्य काम क्या है?
सहकारी चीनी मिलों का समन्वय और प्रतिनिधित्व करना.
Q3. NFCSF चीनी सेक्टर को कैसे कंट्रोल करती है?
उत्पादन, स्टॉक और बिक्री पर नीतिगत सुझाव देना.
Q4. सरकार के साथ NFCSF की क्या भूमिका है?
चीनी, एथेनॉल और गन्ना नीति पर सरकार को सलाह देना.
Q5. NFCSF से किसानों को क्या फायदा है?
गन्ना किसानों के भुगतान और हितों की सुरक्षा.
ये भी पढ़ें-