कान्हा की नगरी मथुरा में खेती की नई राह, सुपाना गांव पहुंचा Kisan Karwan

कान्हा की नगरी मथुरा में खेती की नई राह, सुपाना गांव पहुंचा Kisan Karwan

किसान कारवां अपने दसवें पड़ाव के दौरान छाता तहसील के सुपाना गांव पहुंचा. जहां किसानों को उन्नत बीज, जैविक खेती, फसल विविधीकरण, आधुनिक सिंचाई तकनीक, मिट्टी परीक्षण और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई.

किसान कारवांकिसान कारवां
धर्मेंद्र सिंह
  • Noida,
  • Jan 16, 2026,
  • Updated Jan 16, 2026, 5:06 PM IST

कान्हा की नगरी मथुरा अब सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती के क्षेत्र में भी नई दिशा तय कर रही है. यहां के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और नवाचार को अपनाते नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से चल रहा “किसान कारवां” अपने दसवें पड़ाव पर मथुरा जनपद की छाता तहसील के सुपाना गांव पहुंचा. कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया.

कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत बीज, जैविक खेती, फसल विविधीकरण, आधुनिक सिंचाई तकनीक, मिट्टी परीक्षण और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई. कृषि विशेषज्ञों ने कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय बताते हुए जल संरक्षण और मिट्टी के स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया.

नैनो यूरिया, नैनो डीएपी इस्तेमाल करने की सलाह 

किसान कारवां के मंच से इफको के क्षेत्रीय मैनेजर सत्यवीर सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि आज भी कई किसान खेती में ऐसी गलतियां कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है और उम्मीद के तहत उत्पादन नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और सागरिका जैसे उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इनके प्रयोग से उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा.

"वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसलों का करें चयन"

कार्यक्रम में पहुंचे मांट विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने किसानों से खेती में बदलाव की जरूरत पर बात की. उन्होंने कहा कि आज किसान केवल दो फसलों तक सीमित रह गए हैं, जबकि वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन और सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर खेती करने से उत्पादन और मिट्टी दोनों की सेहत सुधर सकती है.

जलभराव की स्थिति में सिंघाड़े की खेती करने की सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र, मथुरा के प्रभारी डॉ. ए. के. शर्मा ने बताया कि कोसीकला क्षेत्र में जलभराव की गंभीर समस्या है, जिसके चलते 25 से 30 प्रतिशत खेतों में बुवाई नहीं हो पा रही है. उन्होंने किसानों को जलभराव की स्थिति में केला और सिंघाड़ा जैसी फसलों की खेती की सलाह दी, जिससे अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है.

"मुथूट फाइनेंस से गोल्ड लोन लेने होगा आसान"

वहीं, उत्तम फर्टिलाइजर के क्षेत्रीय अधिकारी दीपेश शर्मा ने किसानों को बताया कि कई बार पूरी मेहनत के बावजूद उत्पादन नहीं मिल पाता. ऐसे में उत्तम माइक्रो राजा और उत्तम प्रणाम जैसे उत्पाद बेहतर परिणाम देने में सहायक साबित हो सकते हैं.

किसानों को वित्तीय जागरूकता देने के उद्देश्य से मुथूट फाइनेंस के राया ब्रांच मैनेजर सोनवीर सिंह ने बताया कि जरूरत के समय किसान साहूकारों के चक्कर में न पड़ें. मुथूट फाइनेंस में सुरक्षित तरीके से कम ब्याज दर पर गोल्ड लोन उपलब्ध है, जिसमें जेवर पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

जादूगर सलमान ने दिखाया अपना जादू

मैजिशियन सलमान ने अपने जादुई अंदाज में किसान तक के किसान कारवां के संदेशों को किसानों तक पहुंचाया. उन्होंने मुथूट फाइनेंस के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई. साथ ही चंबल फर्टिलाइजर के उत्पादों को भी रोचक तरीके से प्रस्तुत किया.

"गोबर की खाद और जैविक तत्वों करें उपयोग"

कृषि विज्ञान केंद्र मथुरा के वैज्ञानिक रविंद्र कुमार राजपूत ने मिट्टी जांच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कर आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करनी चाहिए. साथ ही उन्होंने गोबर की खाद और जैविक तत्वों के उपयोग को मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया.

लकी ड्रा के तहत किसानों को मिले पुरस्कार

कार्यक्रम के अंत में किसानों के उत्साहवर्धन के लिए लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 500  रुपये के 10 पुरस्कार घोषित किए गए. वहीं, पहला पुरस्कार 3000 रुपये किसान चेतराम ने जीता, जबकि 2000 रुपये का पुरस्कार किसान परशुराम के नाम रहा. कुल मिलाकर, सुपाना गांव में आयोजित किसान कारवां ने यह संदेश दिया कि सही मार्गदर्शन, वैज्ञानिक खेती और जागरूकता से किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकते हैं.

किसान कारवां पहल का मकसद

किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.

हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.

2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.

3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.

4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.

5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.

6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.

7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.

8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर

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