ICAR का विजन 2047 रोडमैप जारी: धान-गेहूं का रकबा सीमित करने की तैयारी, 52 टीमें बदलेंगी खेती की दशा-दिशा

ICAR का विजन 2047 रोडमैप जारी: धान-गेहूं का रकबा सीमित करने की तैयारी, 52 टीमें बदलेंगी खेती की दशा-दिशा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी है. परिषद का लक्ष्य कृषि उत्पादन, दूध, बागवानी और मत्स्य उत्पादन में बड़ा इजाफा करना है. नई HARVEST योजना और राज्यवार कृषि रोडमैप के जरिए विज्ञान आधारित खेती और किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने की तैयारी की गई है.

ICAR Vision 2047 Roadmap LaunchICAR Vision 2047 Roadmap Launch
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 17, 2026,
  • Updated Jul 17, 2026, 7:30 AM IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया है. इस योजना में फसल विविधीकरण को सबसे अहम रणनीति बनाया गया है. इसके तहत धान के रकबे को 5.3 से 5.5 करोड़ हेक्टेयर के बीच सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है. इसी तरह गेहूं के क्षेत्रफल में भी चरणबद्ध संतुलन लाने की योजना है. इसके साथ ही मक्का, मोटे अनाज, दलहन और बागवानी फसलों का रकबा बढ़ाने पर खास जोर दिया जाएगा, ताकि खेती को बाजार की मांग और जलवायु चुनौतियों के अनुरूप बनाया जा सके.

2047 के लिए 52 टास्क टीमों का गठन

ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने गुरुवार को संस्‍थान के 98वें स्थापना दिवस समारोह में बताया कि इस रोडमैप को नीति आयोग के साथ मिलकर तैयार किया गया है. इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ICAR ने अपने विभिन्न संस्थानों और विभागों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए 52 विशेष टास्क टीमें बनाई हैं. ये टीमें तय रणनीति के अनुसार मांग आधारित कृषि अनुसंधान, तकनीकी विकास और किसानों तक नई तकनीकों की पहुंच बढ़ाने पर काम करेंगी.

कृषि उत्पादन में बड़े विस्तार का लक्ष्य

ICAR ने वर्ष 2047 तक कुल कृषि उत्पादन को मौजूदा लगभग 1.3 अरब टन से बढ़ाकर 2.1 अरब टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. बागवानी उत्पादन को 369.7 मिलियन टन से बढ़ाकर 797 मिलियन टन करने की योजना है. दूध उत्पादन को 247.87 मिलियन टन से बढ़ाकर 628 मिलियन टन और मत्स्य उत्पादन को 19.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 40 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, कृषि वानिकी का क्षेत्र भी 2.84 करोड़ हेक्टेयर से बढ़ाकर 5 करोड़ हेक्टेयर करने की तैयारी है.

मशीनीकरण और पानी के बेहतर इस्‍तेमाल पर जोर

रोडमैप में खेती की दक्षता (Efficiency) बढ़ाने के लिए कई अहम लक्ष्य तय किए गए हैं. कृषि मशीनीकरण का स्तर मौजूदा 47 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है. पोषक तत्व इस्‍तेमाल दक्षता को 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा जल उपयोग दक्षता को 40 से 80 प्रतिशत तक बढ़ाने और फसल कटाई के बाद होने वाले लगभग 20 प्रतिशत नुकसान को खत्‍म करने की दिशा में भी काम किया जाएगा. किसानों तक जरूरत के अनुसार कृषि सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य भी 100 प्रतिशत कवरेज तक बढ़ाया जाएगा.

ICAR ने भविष्य की कृषि रणनीति में घरेलू स्तर पर उर्वरकों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता, भूमि क्षरण को रोकने, नेट-जीरो कृषि को बढ़ावा देने और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने जैसे विषयों को भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है. इन क्षेत्रों में अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

संस्थान ने HARVEST (Harnessing Agri-Food Research, Vibrant Extension and Education for Science-led Transformation) नाम से एक नई एकीकृत योजना भी शुरू की है. इसके तहत ICAR की आठ अलग-अलग योजनाओं को एक साझा ढांचे में जोड़ा गया है. योजना के संचालन के लिए मॉनिटरिंग, मूल्यांकन, डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझा करने और प्रभाव आकलन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी. साथ ही राष्ट्रीय जेंडर प्लेटफॉर्म को भी इससे जोड़ा जाएगा.

राज्यों के लिए अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार हो रहे

प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार ICAR विभिन्न राज्यों के लिए विज्ञान आधारित कृषि रोडमैप भी तैयार कर रहा है. पश्चिम बंगाल का रोडमैप हाल ही में प्रस्तुत किया गया है. इससे पहले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र और गोवा के लिए भी ऐसे दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं. शेष राज्यों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से रोडमैप तैयार किए जाएंगे.

अनुसंधान से कृषि क्षेत्र में बढ़ी आर्थिक हिस्सेदारी

ICAR के अनुसार, बीते वर्ष देश में खाद्यान्न उत्पादन में 1.9 करोड़ टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसकी अनुमानित आर्थिक कीमत करीब 60 हजार करोड़ रुपये रही. बागवानी उत्पादन में हुई वृद्धि से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये, जबकि डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त मूल्य जुड़ा.  मत्स्य क्षेत्र ने भी करीब 40 हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया. इन चारों क्षेत्रों से कुल लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का मूल्य सृजित हुआ, जिसमें करीब 55 हजार करोड़ रुपये का योगदान कृषि अनुसंधान का माना गया.

ICAR ने बताया कि वर्ष 2025 में 34 फसलों की 386 नई किस्में जारी की गईं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु अनुकूल और 29 जैव-संपोषित किस्में शामिल हैं. बागवानी क्षेत्र में 57 फसलों की 117 नई किस्में विकसित की गईं. पशुधन में खुरपका-मुंहपका रोग के प्रकोप में 85 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लिए विकसित वैक्सीन जल्द जारी की जाएगी. 

पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में भी 85 प्रतिशत कमी दर्ज होने का दावा किया गया. 'खेत बचाओ' अभियान के तहत जून तक 728 जिलों में 1,657 टीमों ने 1.31 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनके माध्यम से एक करोड़ किसानों तक सीधे और लगभग पांच करोड़ लोगों तक विभिन्न माध्यमों से जानकारी पहुंचाई गई.

स्थापना दिवस समारोह में कई केंद्रीय मंत्री रहे मौजूद

ICAR के 98वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर और एस. के. सिंह बघेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू भी उपस्थित रहे. समारोह में कृषि अनुसंधान की उपलब्धियों और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विज्ञान आधारित कृषि रणनीति पर जोर दिया गया. (पीटीआई)

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